मेघालय की राजनीति में बुधवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के आठ विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में इन विधायकों ने भाजपा का दामन थामा। भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों में लाहकेन रिंबुई, पियुस मारवीन, किर्मेन शायला, मायरेलबार्न सिएम, मैथ्यू कुर्बाह, ओलान सिंग सुइन, बालाजीड कुफर सिनरेम और सिनशर कुफर रॉय शामिल हैं।



विधानसभा में भाजपा की ताकत 10 पहुंची
मेघालय विधानसभा में यूडीपी के कुल 12 विधायक हैं और विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं। इनमें से दो विधायक कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व वाली मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस सरकार में मंत्री भी हैं। यूडीपी के आठ विधायकों के भाजपा में जाने के बाद विधानसभा में भाजपा की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई है।
भाजपा में गए तीन विधायकों पर यूडीपी की कार्रवाई
इधर, यूडीपी ने भाजपा में शामिल हुए अपने आठ विधायकों में से तीन ओलान सिंग सुइन, किर्मेन शायला और मैथ्यू कुर्बाह को निलंबित कर दिया है। क्षेत्रीय पार्टी ने उन विधायकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है, जिन्होंने पार्टी छोड़कर भाजपा का रुख किया। यूडीपी अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह ने बताया कि इन तीनों विधायकों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था।
2028 के चुनाव से पहले बदले राजनीतिक समीकरण
आठ विधायकों के भाजपा में जाने से राज्य की राजनीति में भाजपा की भूमिका और प्रभाव बढ़ने की चर्चा शुरू हो गई है। खास तौर पर 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम को अहम माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यूडीपी और भाजपा दोनों ही फिलहाल एनपीपी के नेतृत्व वाली मेघालय सरकार में सहयोगी हैं।
‘मेघालय के लिए अहम राजनीतिक घटनाक्रम’
भाजपा में शामिल हुए यूडीपी विधायकों का स्वागत करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर और मेघालय में हो रही प्रगति को देखते हुए भाजपा का साथ चुना है। भाजपा मुख्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिजिजू ने इसे सिर्फ पूर्वोत्तर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम बताया। उन्होंने कहा कि यह मेघालय के लिए एक निर्णायक क्षण है।
‘अचानक नहीं हुआ फैसला’
अमलारेम से विधायक लाहकेन रिंबुई ने कहा कि उनके समेत सभी आठ विधायकों ने भाजपा में शामिल होने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। रिंबुई ने कहा कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। इसको लेकर काफी समय से बातचीत चल रही थी। उन्होंने कहा कि कई विधायक समाज के लिए काम करने की इच्छा रखते हैं और राज्य से जुड़े कुछ मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर उन्हें सरकार के सहयोग की जरूरत है।
खासी भाषा से लेकर कोयला खनन तक कई मुद्दे
रिंबुई के मुताबिक, खासी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना, मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट को लागू करना और मेघालय में कोयला खनन को आसान बनाना उन प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं, जिन पर केंद्रीय नेतृत्व ने सकारात्मक रुख दिखाया है।
‘सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा’
शिलांग में मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा कि यूडीपी के आठ विधायकों के भाजपा में शामिल होने से एनपीपी के नेतृत्व वाली एमडीए सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ह संबंधित विधायकों का व्यक्तिगत फैसला है और इस पर उन्हें कुछ नहीं कहना है। उन्होंने साफ किया कि सत्तारूढ़ गठबंधन की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है, क्योंकि पार्टी बदलने वाले विधायक गठबंधन के भीतर ही एक सहयोगी दल से दूसरे सहयोगी दल में गए हैं।
‘हमारे पास अब भी मजबूत बहुमत’
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में सरकार के पास अब भी मजबूत बहुमत है और उन्हें भरोसा है कि सब कुछ पहले की तरह चलता रहेगा। ब उनसे पूछा गया कि क्या भाजपा ने सरकार में मंत्रियों की संख्या बढ़ाने की मांग की है, तो संगमा ने कहा कि भाजपा ने ऐसी कोई मांग नहीं की है।
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यूडीपी ने दिया था जवाब देने का मौका
यूडीपी अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह ने कहा कि पार्टी ने तीनों विधायकों को बुधवार तक राज्य संसदीय बोर्ड के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने या लिखित जवाब देने का मौका दिया था। लेकिन इनमें से किसी भी विधायक ने कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं दिया। मेतबाह लिंगदोह और लाहकेन रिंबुई दोनों ही इस समय कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री हैं।