- तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन ने यूएनजीए में फिर कश्मीर मुद्दा उठाया।
- उन्होंने यूएन चार्टर के तहत बातचीत से समाधान का आह्वान किया।
- भारत ने हमेशा एर्दोगन के कश्मीर बयानों का विरोध किया है।
तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भारत के खिलाफ गंदी चाल चली है. एर्दोगन ने यूएनजीए के प्लेटफॉर्म से फिर से कश्मीर के मुद्दे को उठाया है. उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के सभी विवादों, जिसमें कश्मीर का मुद्दा भी शामिल है, को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के फ्रेमवर्क के अंदर बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए.
UNGA में दिए संबोधन में क्या बोले एर्दोगन?
अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक में मंगलवार (22 सितंबर, 2026) को अपने संबोधन के दौरान तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा, ‘दक्षिण एशिया में यह बहुत ही जरूरी है कि कश्मीर मुद्दे के साथ-साथ बाकी सभी विवादों को यूएन चार्टर और अन्य संबंधित प्रस्तावों के फ्रेमवर्क के अंदर बातचीत और चर्चा के जरिए सुलझाया जाए.’
एर्दोगन के बयानों पर क्या रहा है भारत का स्टैंड?
पिछले कई सालों से तुर्किए के राष्ट्रपति बार-बार संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से कश्मीर के मुद्दे को उठाते रहे हैं. हालांकि, भारत ने हर बार कश्मीर के मुद्दे पर अपनी संप्रभुता को लेकर अपना स्टैंड क्लीयर किया है. भारत हर बार एर्दोगन के बयानों की खुले तौर पर आलोचना कर चुका है, उस पर आपत्ति जताता रहा है और बार-बार यह दोहराया है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है.
भारत ने एर्दोगन की टिप्पणियों के बाद यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया था कि तुर्किए को दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और उसे भारत के आंतरिक मामले में अपने टांग अड़ाने और कुछ भी बयानबाजी करने से बचना चाहिए, लेकिन एर्दोगन ने लगातार भारत के खिलाफ अपने गंदे चाल को जारी रखा है और एक बार फिर से उन्होंने यूएनजीए के मंच का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया है.
एर्दोगन की टिप्पणियों को लेकर भारत की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं दी गई. यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी तुर्किए की प्रस्तावित यात्रा को भी कैंसिल कर दिया था, जबकि भारत ने अंकारा के साथ अपने रक्षा सहयोग को भी सीमित करने की दिशा में बड़े कदम उठाए थे.
कश्मीर को लेकर एर्दोगन की टिप्पणियां
एर्दोगन ने कई मौकों पर UNGA में दिए अपने संबोधनों के दौरान कश्मीर को लेकर टिप्पणी की है. हालांकि, उनकी बयानबाजी का टोन अलग-अलग तरह का रहा है, लेकिन उनके दिए भाषणों में कश्मीर का मुद्दा हमेशा शामिल रहा है. उनकी तरफ से सबसे विवादित टिप्पणी साल 2019 में दी गई थी. यह वो वक्त था जब भारत ने जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के लिए संविधान के आर्टिकल 370 के प्रावधानों को पूरी तरह से रद्द किया था.
सितंबर 2019 में UNGA के 74वें सत्र के दौरान तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन ने अपने संबोधन में कहा था, ’करीब 80 लाख लोग नाकेबंदी में रह रहे हैं और दुर्भाग्य है कि वो कश्मीर से बाहर भी नहीं निकल पा रहे हैं.’ उन्होंने यह भी कहा था, ‘पिछले 72 सालों के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस विवाद पर पर्याप्त रूप से ध्यान देने में नाकाम रहा है.’
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