इस फैसले से अखिलेश ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। पहला निशाना जयंत चौधरी हैं, जिनकी कर्मभूमि मांट विधानसभा रही है और वे यहां से सांसद भी रह चुके हैं। उन्हें उन्हीं के क्षेत्र में घेरकर जाट-गुर्जर ध्रुवीकरण के जरिए चुनौती दी जा रही है। दूसरा निशाना मथुरा से लगातार तीन बार सांसद बनकर हैट्रिक लगाने वाली हेमा मालिनी हैं, जिनके किले में सपा अब संगठन मजबूत कर सेंध लगाना चाहती है।


अखिलेश ने चला गुर्जर दांव
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