सऊदी अरब ने पुष्टि की है कि यमन के हूती विद्रोहियों ने उसकी राजधानी रियाद को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाने की कोशिश की। शनिवार देर रात सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यह जानकारी दी। गठबंधन यमन में हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सऊदी समर्थित बलों का नेतृत्व करता है। उसके मुताबिक, मिसाइल को हमले के प्रयास के दौरान ही रोक लिया गया था। यह रियाद को निशाना बनाकर किया गया पहला हमला था, जब से ईरान समर्थित हूतियों और सऊदी समर्थन वाले यमनी सरकारी बलों के बीच लड़ाई तेज हुई है।
हूतियों ने सऊदी अरब में और किन जगहों को निशाना बनाने की कोशिश की?
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि हूतियों ने लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू के अलावा ताइफ, बायश और फरासन में नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की भी कोशिश की। गठबंधन के मुताबिक इन प्रयासों को भी नाकाम कर दिया गया। हालांकि, बयान में इन हमलों के बारे में इससे ज्यादा जानकारी नहीं दी गई।
हूतियों ने हमले को लेकर क्या दावा किया?
हूतियों ने इससे पहले दावा किया था कि उन्होंने रियाद में कुछ ‘संवेदनशील ठिकानों’ और यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको को निशाना बनाया। हूतियों ने दावा किया कि इन हमलों के कारण ‘भारी आग’ लगी। हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको ने टिप्पणी के लिए भेजे गए अनुरोध का जवाब नहीं दिया।
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इससे पहले भी सऊदी के तेल ढांचे पर हुआ था हमला
रियाद पर ताजा मिसाइल हमले की कोशिश से पहले सऊदी अरब के अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला हुआ था। 11 सितंबर को हुए इस हमले के बाद पाइपलाइन का संचालन रोकना पड़ा, जिससे सऊदी के लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह से तेल निर्यात प्रभावित हुआ। इसी के चलते सऊदी अरामको ने यूरोप के कम से कम दो रिफाइनिंग ग्राहकों को अक्तूबर में दी जाने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति नहीं करने की जानकारी दी है। सऊदी और इराकी अधिकारियों ने कहा है कि ड्रोन इराक से आए थे, लेकिन हमले के पीछे वास्तव में कौन था, इसकी स्पष्ट जिम्मेदारी अभी सामने नहीं आई है।

