उत्तराखंड स्थित आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने डिग्री पाने वाले छात्रों को संबोधित किया। इस दौरान अजीत डोभाल ने छात्रों को पिछले एक हजार साल की सबसे भाग्यशाली पीढ़ी बताया। वहीं हरीश साल्वे ने बदलती विश्व व्यवस्था के बीच छात्रों को उनकी जिम्मेदारियों का अहसास कराया।
क्या बोले एनएसए अजीत डोभाल?
एनएसए अजीत डोभाल ने छात्रों से कहा- शायद आपको इस बात का एहसास नहीं है कि आप पिछले 1,000 वर्षों की सबसे भाग्यशाली पीढ़ी हैं, जिसके पास अवसरों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि उनसे पहले की पीढ़ियां गुलामी के दौर में संघर्ष कर रही थीं और उनके सामने ऐसे रास्ते नहीं खुले थे। आज न सिर्फ देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी परिस्थितियां पहले से काफी बेहतर हुई हैं। उन्होंने कहा कि छात्र ऐसे दौर में आ रहे हैं, जहां किसी भी देश या समाज की तरक्की के लिए तकनीक सबसे महत्वपूर्ण आधार बनने जा रही है।
VIDEO | Addressing at the IIT Roorkee convocation ceremony, National Security Advisor (NSA) Ajit Doval says, “You may not be conscious of the fact that, in the last 1,000 years, you are the luckiest generation, which is going to have so many opportunities. Generations before you… pic.twitter.com/w1EWwMaBpv
— Press Trust of India (@PTI_News) September 19, 2026
डोभाल ने कहा कि छात्र देश के सबसे प्रतिष्ठित और पुराने संस्थानों में से एक से पास हो रहे हैं, जिसने देश के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने छात्रों के माता-पिता को बधाई दी, जिन्होंने बच्चों को प्रेरित किया और उन्हें इस उपलब्धि तक पहुंचाया। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षकों और प्रोफेसरों का भी आभार जताया, जिन्होंने ऐसा माहौल तैयार कर ज्ञान दिया जिससे छात्र खुद के साथ-साथ समाज, राष्ट्र और मानवता की भलाई में अपना योगदान दे सकें।
ये भी पढ़ें: पर्यावरण संरक्षण में भारत का बजा डंका: पीएम मोदी बोले- दुनिया को दिशा दिखा रहे; हाइड्रोजन ट्रेन का किया जिक्र
अधिवक्ता हरीश साल्वे ने क्या कहा?
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि यह ऐसी पहली पीढ़ी है, जो एक ऐसी दुनिया में जा रही है जो खुद को नए सिरे से बदलने की जद्दोजहद में लगी है। उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी जिस पुरानी विश्व व्यवस्था को देखती आई थी, आज उसका रूप पूरी तरह बदल चुका है। जिस नियम-आधारित व्यवस्था को कभी स्वाभाविक मान लिया गया था, वह अब पहले जैसी सुरक्षित नहीं रही। यह व्यवस्था कभी बहाल होगी या नहीं, इसका फैसला वक्त करेगा।
साल्वे ने कहा कि अपनी आजादी और लोकतंत्र को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि वह खुद आजादी के बाद पैदा हुए हैं। उनकी पीढ़ी ने कानून के राज को बहुत सहज मान लिया था और वे कम सुविधा वाले देशों को दया भाव से देखते थे। उस समय यह समझ नहीं थी कि आजादी और लोकतंत्र के मूल्य कितने नाजुक होते हैं। उन्होंने कहा कि अब नई विश्व व्यवस्था के निर्माण की बहुत बड़ी जिम्मेदारी इन युवाओं के कंधों पर होगी। उन्होंने भरोसा जताया कि इसमें छात्रों को बड़ा फायदा मिलेगा, क्योंकि आज की नई वैश्विक व्यवस्था के केंद्र में तकनीक ही मौजूद है।


