चेन्नई के ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणी के खिलाफ पॉक्सो मामले की चल रही जांच में कई ऐसी पीड़िताओं की पहचान हुई है, जिनका कथित तौर पर पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने दुष्कर्म किया था। यह जानकारी पुलिस ने शुक्रवार को दी।
पुलिस ने क्या बताया?
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पीड़िताओं के बयान यहां की अदालत में दर्ज किए गए और कथित शोषण के समय कई पीड़िताएं नाबालिग थीं। जांच से पता चला है कि पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। उनमें से कुछ गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं। बताया जा रहा है कि आरोप मासूमों को काम पर रखता था, फिर, लंबे समय तक उनका शोषण करता था।
हालिया जानकारी के बाद, कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आरोप जोड़े हैं, क्योंकि यह पुष्टि हो गई है कि एक पीड़ित एससीसमुदाय से है। पुलिस ने कहा कि इस अधिनियम के तहत पीड़ित को आर्थिक मदद दी जाएगी।
कोर्ट ने तीन दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा
इस बीच, यहां की एक अदालत ने उत्पीड़न के मामले में जेम ग्रुप के चेयरमैन वीरमणि को तीन दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। वीरमणि 80 साल से ज्यादा उम्र के हैं। पॉक्सो मामले में गिरफ्तारी के बाद उन्हें यहां पुझल सेंट्रल जेल में रखा गया था।
उनकी उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए, पॉक्सो अदालत ने जांच अधिकारियों को जेल परिसर के अंदर ही पूछताछ करने का निर्देश दिया। अदालत ने वीरमणि को कस्टडी के दौरान रोजाना अपने वकील से मिलने की भी इजाजत दी। इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या किसी और नाबालिग का भी शोषण हुआ है।
कब हुई थी गिरफ्तारी?
वीरमणि को पिछले महीने उनके दो साथियों शांति (60) और उनके पति महेंद्र सिम्हन (63) के साथ गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी 2019 में यहां एक नाबालिग लड़की के शोषण के मामले में की गई थी। तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
पुलिस ने यह भी बताया कि यह मामला अक्तूबर 2025 में तब दर्ज किया गया था, जब जांच टीम को एक वीडियो क्लिप मिली थी, जिसमें कथित तौर पर वीरमणि द्वारा एक नाबालिग लड़की का उत्पीड़न करते हुए दिखाया गया था।

