मुंबई के बर्खास्त पुलिस अफसर सचिन वाजे ने दिशा सालियान की मौत के मामले में दर्ज नई सीबीआई एफआईआर को लेकर स्पेशल एनआईए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वाजे ने आरोप लगाया है कि एफआईआर में उनका नाम आने के बाद कुछ वकीलों और मीडिया के जरिए उनके खिलाफ माहौल बनाने और उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि अगर सीबीआई इस मामले में उन्हें पेश करने या हिरासत में लेने की मांग करती है, तो कोई भी आदेश देने से पहले उनका पक्ष जरूर सुना जाए।
सचिन वाजे ने दायर की अपील
एंटीलिया बम कांड और मनसुख हिरेन हत्याकांड में न्यायिक हिरासत में चल रहे वाजे ने गुरुवार को अपनी वकील दिशा हटकर के जरिए दो पेज की अर्जी दाखिल की। वाजे का कहना है कि उन्हें इस नई एफआईआर के बारे में अखबारों और दूसरे मीडिया माध्यमों से पता चला। उन्होंने कोर्ट को बताया कि एफआईआर में उनका नाम दर्ज है, लेकिन उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है। ऐसे में यदि सीबीआई उन्हें इस मामले में पेश कराने की मांग करती है, तो उस पर फैसला लेने से पहले उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
अर्जी में दावा- बदनाम करने की मुहिम
वाजे ने अपनी अर्जी में बदनाम करने की मुहिम का भी जिक्र किया है। उनका दावा है कि उन्हें पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह, अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती और कुछ बड़े नेताओं के साथ एक ग्रुप का हिस्सा बताकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने दिशा सालियान के पिता की ओर से पैरवी कर रहे वकील से किसी तरह के संबंध से भी इनकार किया है। वाजे ने ऐसी किसी भी संभावना से भी इनकार किया है कि दिशा सालियान मामले में उनके खिलाफ कोई ‘एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल कन्फेशन’ सामने आ सकता है।
सीबीआई की एफआईआर में हैं कई बड़े नाम
यह मामला बॉम्बे हाई कोर्ट के 2 सितंबर के आदेश के बाद नए सिरे से शुरू हुआ है। कोर्ट ने दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की याचिका पर सीबीआई को उनकी बेटी की मौत से जुड़े पूरे मामले की जांच करने और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद सीबीआई ने सतीश सालियान का बयान दर्ज कर एफआईआर दर्ज की। एफआईआर में कई लोगों के नाम हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जानी है। इनमें सचिन वाजे और पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के अलावा आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत अन्य नाम शामिल हैं।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ किया था कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री सामने आने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाए।


