दिल्ली की हवा खराब होने पर अमूमन चर्चा धूल के महीन कणों पीएम2.5 और पीएम10 के इर्द-गिर्द होती है, लेकिन साफ दिखाई न देने वाली एक प्रदूषक गैस भी सेहत पर भारी पड़ रही है। यह सतह के आसपास मौजूद, ग्राउंड लेवल ओजोन है। यह वही गैस है, जो धरती के परिवेश को सूर्य की खतरनाक अल्ट्रावायलेट किरणों सुरक्षित रखती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट बताती हैं कि दिल्ली-एनसीआर में पूरे साल ओजोन खतरा बढ़ा रही है।
सीएसई ने एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक मार्च से 10 मई 2026 के बीच किए गए अध्ययन के 71 दिनों में दिल्ली-एनसीआर में आठ घंटे का राष्ट्रीय मानक 100 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर को हर दिन पार कर गया। दिल्ली में औसतन 8.79 मॉनिटरिंग स्टेशन रोजाना मानक से ऊपर रहे, जबकि एनसीआर के शहरों में यह आंकड़ा औसतन 3.2 स्टेशन था। दिल्ली में पूसा आईएमडी, जबकि एनसीआर में ग्रेटर नोएडा का नॉलेज पार्क-5, नोएडा सेक्टर-125 और गाजियाबाद का वसुंधरा प्रमुख हॉटस्पॉट रहे। ग्रेटर नोएडा नॉलेज पार्क-5 में 44 दिन ओजोन मानक से ऊपर रही।
सीएसई की डिप्टी प्रोग्राम मैनेजर, अर्बन लैब शरणजीत कौर बताती हैं कि दिन के साथ रातों में भी इसका स्तर कई जगहों पर मानक से ज्यादा पाया गया। इसमें अमूमन प्रदूषण से सुरक्षित माने वाले हरित क्षेत्र भी शामिल हैं, जहां ओजोन की मात्रा खुली जगहों से ज्यादा पाई गई है। ऐसा इसी साल नहीं हुआ है। बीते साल की सीपीसीबी की रिपोर्ट भी इसकी तस्दीक करती है कि हवा में मौजूद ओजोन लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है।
सीपीसीबी की रिपोर्ट भी बता रही हालात चिंताजनक
सीपीसीबी की बीते साल की एक रिपोर्ट में भी दर्ज है कि दिल्ली-एनसीआर के 57 में से 25 निगरानी स्टेशनों पर आठ घंटे की सीमा से अधिक समय तक ओजोन प्रदूषण रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, वाहनों, बिजलीघरों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड (नॉक्स), वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (वॉक्स) और कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) सूरज की रोशनी में रासायनिक प्रतिक्रिया से ओजोन बनाते हैं। इसके बनने के लिए हवा में मौजूद दूसरे प्रदूषकों और सूर्य की रोशनी की जरूरत होती है। यही वजह है कि गर्म और धूप वाले दिनों में ओजोन की समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है। यह गैस सांस की बीमारियों, विशेष रूप से अस्थमा और दमा को बढ़ावा देती है, साथ ही फसलों को नुकसान पहुंचाकर खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालती है। बच्चे, बुजुर्ग और सांस के मरीजों को इससे बड़ा खतरा रहता है।
दिल्ली की स्थिति
- 71/71 दिन : मार्च-10 मई 2026, दिल्ली-एनसीआर में हर दिन ओजोन मानक से ऊपर
- 92/92 दिन : मार्च-मई 2025 में दिल्ली में ओजोन मानक से ऊपर
- 472 µg/m³ : CRRI मथुरा रोड पर अधिकतम 8 घंटे का स्तर
- 135 µg/m³ : 13 अप्रैल 2025 को दिल्ली-एनसीआर का औसत चरम स्तर
- 8.79 स्टेशन: 2026 में दिल्ली में रोज औसतन मानक से ऊपर रहने वाले स्टेशन
- 55 रात: 2025 में नजफगढ़ में रात के समय उच्च ओजोन
- 46 रात: 2026 अध्ययन अवधि में दिल्ली-एनसीआर में रात का ओजोन स्तर ज्यादा
सतही ओजोन और इसका असर
- जमीन के पास बनने वाली ओजोन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है।
- सूर्य की रोशनी में नॉक्स और वॉक्स की रासायनिक प्रतिक्रिया से बनती है।
- आंखों और गले में जलन तथा सांस संबंधी परेशानी बढ़ा सकती है।
- अस्थमा के मरीजों और बच्चों पर ज्यादा असर पड़ सकता है।
- तेज धूप और गर्म मौसम में इसका स्तर बढ़ने की संभावना रहती है।


