- P2P पेमेंट पर ग्राहक से लिए होते हैं नि:शुल्क
- मर्चेंट पेमेंट पर भी ग्राहकों को नहीं देना होता एक्स्ट्रा चार्ज
- मर्चेंट अकाउंट के मालिक (व्यापारियों) को देना पड़ सकता है चार्ज
आजकल तो किसी दोस्त को पैसे भेजने हों, घर का बिल देना हो या दुकान पर सामान खरीदना हो, UPI सबसे आसान तरीका बन गया है. लेकिन कई लोगों के मन में अभी भी ये सवाल रहता है कि अगर UPI से किसी दोस्त को 5000 रुपए भेजे जाएं तो क्या इसके लिए अलग से चार्ज देना पड़ता है? वहीं किसी दुकान या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर UPI से पेमेंट करने पर क्या नियम अलग हैं?
UPI में होने वाले पेमेंट को मोटे तौर पर P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति और P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी समझा जाता है. देखने में तो दोनों में पैसे भेजने का तरीका एक जैसा दिख सकता है, लेकिन पेमेंट किसे किया जा रहा है, इसके आधार पर इन दोनों में काफी अंतर है.
दोस्त को 5,000 रुपए भेजने पर कितना चार्ज लगेगा?
अगर आप अपने दोस्त, परिवार में किसी को अपने बैंक अकाउंट में UPI से 5000 रुपए भेज रहे हैं तो ये P2P ट्रांजैक्शन कहलाएगा. नॉर्मल बैंक अकाउंट से किए जाने वाले ऐसे UPI ट्रांसफर पर ग्राहक से अलग से कोई चार्ज नहीं लिया जाता है. यानी अगर आपको दोस्त को 5000 रुपए भेजने हैं तो आपके खाते से 5000 रुपए ही डेबिट होंगे और सामने वाले को 5000 रुपए ही मिलेंगे.
फिर क्या बदला है?
बात सिर्फ इतनी सी है कि अब सरकार ने नया प्रस्ताव रखा है. जिन भी व्यापारियों का टर्नओवर 1.5 करोड़ सलाना से ज्यादा है, उनसे 2000 से ऊपर से ट्रांजेक्शन पर 0.3% से 0.5% तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट लेने पर प्रस्ताव आया है. इससे फिलहाल आम आदमी को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
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P2P पेमेंट क्या होता है?
P2P का मतलब है व्यक्ति से व्यक्ति यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसा भेजना. मान लिजिए आपने अपने दोस्त को 5000 रुपए भेजे या फिर अपने माता-पिता को पैसे ट्रांसफर किए या किसी रिश्तेदार के ही बैंक अकाउंट में पैसे भेज दिए तो ये P2P पेमेंट है. यहां कोई शॉपिंग नहीं हो रही है, बस एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को पैसा भेज रहा है.
फिर मर्चेंट पेमेंट क्या होता है?
जब आप किसी दुकान, कंपनी या बिजनेस को किसी सामान या सर्विस के बदले पैसे देते हैं तो इसे P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी पेमेंट कहते हैं. जैसे आपने किसी दुकान पर 2000 रुपए का सामान खरीदा और दुकानदार के यूपीआई क्यूआर कोड से पेमेंट किया तो ये मर्चेंट पेमेंट है. इसी तरह किसी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट पर सामान खरीदते समय UPI से जो पेमेंट करते हैं वो भी मर्चेंट ट्रांजैक्शन होता है.
साफ शब्दों में समझें तो मान लीजिए आपने दोस्त को 5000 रुपए भेजे हैं और ये P2P ट्रांजैक्शन ही है. फिर इसके बाद आपने अगर किसी दुकान से 5000 रुपए का सामान खरीदा और दुकानदार के UPI QR पर पेमेंट किया तो ये P2M यानी मर्चेंट पेमेंट है. रकम दोनों मामलों में 5000 रुपए ही हैं, लेकिन पेमेंट की कैटेगरी अलग- अलग है.
क्या मर्चेंट को UPI पेमेंट पर चार्ज देना पड़ता है?
ग्राहक से चार्ज लेना और मर्चेंट से चार्ज लेना, दोनों में काफी ज्यादा अंतर है. UPI से पेमेंट करने वाले ग्राहक के लिए बैंक अकाउंट से किए गए UPI पेमेंट को फ्री रखा गया है. लेकिन मर्चेंट पेमेंट अकाउंट जिसका भी होगा उनके लिए कुछ चार्जेज (जैसे 0.25% से 3.5%) रखे गए हैं.
इसका मतलब ये नहीं है कि दुकानदार हर UPI पेमेंट पर ग्राहक से अलग से चार्ज वसूल सकता है. ग्राहक को पेमेंट स्क्रीन पर दिख रहे पैसे को देखकर ही पेमेंट करना चाहिए.
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UPI पेमेंट चार्ज को लेकर क्यों होती है कन्फ्यूजन?
दरअसल, UPI के पीछे सिर्फ ग्राहक और दुकानदार नहीं होते हैं. बैंक, पेमेंट ऐप भी इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा हैं. इसके अलावा UPI पर अलग-अलग तरह के पेमेंट इंस्ट्रूमेंट भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं. NPCI के नियमों में ऐसे ट्रांजैक्शन के लिए अलग इंटरचेंज रखा गया है. इसलिए ये मान लेना सही नहीं है कि UPI से होने वाला हर एक ट्रांजैक्शन बिल्कुल एक ही तरीके से प्रोसेस होता है.
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