- चीन ने नागरिकों के विदेश जाने पर नए प्रतिबंध लगाए हैं.
- राष्ट्रीय सुरक्षा या तकनीकी उल्लंघन पर यात्रा पर रोक लगेगी.
- सेमीकंडक्टर विशेषज्ञ, सरकारी कर्मचारी भी होंगे इन नियमों से प्रभावित.
चीन ने अपने नागरिकों के लिए देश से बाहर जाना और मुश्किल बना दिया है. चीन के नए एंट्री-एग्जिट नियम (Provisions) के तहत अब वह लोगों पर देश से बाहर जाने पर रोक (एक्जिट बैन) लगा सकता है.
क्या है चीन का नया नियम?
इन नए नियमों के अनुसार, अगर चीन को लगता है कि किसी नागरिक ने सफर के दौरान देश की सुरक्षा या हितों को नुकसान पहुंचाया है, तो उनके वापस आने के बाद उन्हें तीन साल तक चीन से बाहर जाने से रोका जा सकता है. यही यात्रा प्रतिबंध उन लोगों पर भी लागू होता है, जो टेक्नोलॉजी के आयात और निर्यात से जुड़े कानूनों का उल्लंघन करते हुए पकड़े जाते हैं. यानी कि चीन के नए नियमों का सीधा मतलब है कि अब चीनी सरकार सुरक्षा के नाम पर किसी भी व्यक्ति को देश से बाहर जाने से रोक सकती है.
किन पर रोक लगा सकता है चीन?
चीन नए नियमों का इस्तेमाल कर सेमीकंडक्टर (चिपमेकिंग), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या दूसरे एडवांस्ड टेक्नीकल फील्ड से जुड़े लोगों को देश छोड़ने से रोक सकते हैं. चीन ऐसा तब करेगा, जब उसे इन पर तकनीकी आयात-निर्यात नियमों या ‘एक्सपोर्ट कंट्रोल’ के उल्लंघन का संदेह होगा. इसके साथ ही अमेरिका के साथ बढ़ते तकनीकी मुकाबले के बीच चीन एग्जिट बैन का इस्तेमाल कर प्रतिभा और बौद्धिक संपदा के पलायन को रोक सकता है ताकि वे विदेशी कंपनियों की पहुंच से बाहर रहे.
इन पर भी लग सकता है बैन
अगर कोई चीनी नागरिक विदेश में कोई ऐसी गतिविधि या गैर-कानूनी काम में शामिल पाया जाता है, जिससे चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा या संप्रभुता को नुकसान पहुंचता है, तो देश में वापस लौटने पर उस व्यक्ति के दोबारा विदेश जाने पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक की रोक लगाई जा सकती है.
सरकारी कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
चीन में सरकारी अधिकारी, सिविल सर्वेंट्स को लेकर पहले से ही नियम कड़े थे. अब नए नियमों के तहत गोपनीय जानकारी तक पहुंच रखने वाले लोगों और यहां तक कि कुछ सरकारी डॉक्टरों और शिक्षकों को भी विदेश यात्रा से पहले कड़े अप्रूवल लेने पड़ रहे हैं या पासपोर्ट सरेंडर करने पड़ रहे हैं.
चीन के इस नए फरमान का ही खौफ है, जिससे अमेरिका जैसे कई देश पहले ही अपनी ‘लेवल-2’ ट्रैवल एडवाइजरी में अपने नागरिकों को सचेत कर चुके हैं कि चीन में व्यावसायिक विवादों या सरकारी जांच में सहयोग के लिए विदेशी नागरिकों पर भी मनमाने ढंग से एग्जिट बैन लगाए जा सकते हैं.
हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि नया नियम चीन के लिए विदेश में चीनी नागरिकों की गतिविधियों पर नजर रखने और उन पर दबाव बनाने का एक और जरिया होगा. जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर फॉर एशियन लॉ’ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर टॉम केलॉग ने BBC चीन को बताया कि यात्रा पर लगी इन पाबंदियों का इस्तेमाल उन लोगों के खिलाफ किया जा सकता है जो सरकार की आलोचना करते हैं या अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं.
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