ईरान के अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए नए एंट्री और एग्जिट रूट की डिटेल्स पर सहमत हो गए हैं. वे सोमवार को मस्कट में होने वाली एक क्षेत्रीय बैठक में अपनी बातचीत के नतीजों के बारे में खाड़ी देशों को जानकारी देंगे.
सिन्हुआ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हुआ है, जहां रणनीतिक जलमार्ग क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय ध्यान का मुख्य केंद्र बना हुआ है. बातचीत के बाद ईरान और ओमान नए रास्तों पर सहमत हुए हैं और मस्कट में होने वाली क्षेत्रीय बैठक में खाड़ी देशों के सामने इनका विवरण पेश किया जाएगा.
मसूद पेजेश्कियान का बयान
ब्रिक्स समिट के दौरान इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि ब्रिक्स को अमेरिका की एकतरफा प्रतिबंध लगाने की नीति का मुकाबला करने के लिए बनाया गया था. पेजेश्कियान ने कहा, “ब्रिक्स का मकसद और हमारे यहां आने का कारण यह है कि अमेरिका ने जो चलन शुरू किया है, जिसमें वह असल में अपनी मर्जी से किसी भी देश पर प्रतिबंध लगा देता है उसके खिलाफ काम किया जाए. दूसरी ओर ब्रिक्स का इरादा इस तरह की तानाशाही को खत्म करना है. इसीलिए ब्रिक्स बनाया गया था.”
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सदस्यों को अलग-अलग देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से हटकर व्यापार और सहयोग के वैकल्पिक तरीके विकसित करने चाहिए. उन्होंने कहा, “हमें बातचीत, व्यापार और सहयोग के तरीकों को बदलना चाहिए, भले ही कोई देश अपनी मर्जी से दूसरे देशों पर प्रतिबंध लगा दे.” पेज़ेशकियन ने कहा कि ब्रिक्स सदस्यों को एकतरफा रवैये का मुकाबला करने के लिए एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए. उन्होंने कहा, “हम यहां एक-दूसरे की मदद और समर्थन करने के लिए हैं ताकि इस एकतरफा रवैये का मुकाबला किया जा सके.”
इस बीच विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने शनिवार को कहा कि ब्रिक्स देश पश्चिम एशिया की स्थिति पर एक राय बनाने पर सहमत हुए हैं और बातचीत व कूटनीति को विवादों को सुलझाने के लिए मुख्य आधार माना गया है.
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