इस्माइली शिया मुसलमानों के 50वें वंशानुगत इमाम (आध्यात्मिक नेता) और आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क के अध्यक्ष प्रिंस रहीम आगा खान पंचम सात दिवसीय दौरे पर बुधवार को भारत पहुंचे। प्रिंस रहीम आगा खान पंचम, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के निमंत्रण पर नई दिल्ली पहुंचे। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा पोस्ट में कहा, ’50वें इमाम के रूप में पदभार संभालने के बाद पहली बार भारत आए महामहिम प्रिंस रहीम आगा खान पंचम का गर्मजोशी से स्वागत है। यह यात्रा सामाजिक विकास और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क के साथ जारी सहयोग की समीक्षा करने और विभिन्न विकास तथा सामुदायिक पहलों में सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर प्रदान करेगी।’
विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 15 सितंबर तक चलने वाले अपने दौरे के दौरान प्रिंस रहीम नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों के अलावा प्रिंस रहीम अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद का दौरा भी करेंगे। इन शहरों में आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क विभिन्न विकास और सामुदायिक पहलों से जुड़ा हुआ है।
प्रिंस रहीम को फरवरी 2025 में शिया इस्माइली मुसलमानों का 50वां वंशानुगत इमाम नियुक्त किया गया था। उनके पिता प्रिंस करीम अल-हुसैनी आगा खान चतुर्थ के निधन के बाद ऐतिहासिक शिया इमामी इस्माइली परंपरा के अनुसार उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई। अपने 1,400 वर्षों के इतिहास में इस्माइली समुदाय का नेतृत्व एक जीवित, वंशानुगत इमाम करते रहे हैं।
दुनिया के 35 से ज्यादा देशों में रहते हैं इस्माइली समुदाय के लोग
इस्माइली समुदाय 35 से अधिक देशों में रहता है और इसकी आबादी करीब 1.2 से 1.5 करोड़ बताई जाती है। प्रिंस रहीम आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क की कई एजेंसियों के बोर्ड में भी शामिल हैं। वह इंस्टीट्यूट ऑफ इस्माइली स्टडीज के कामकाज और इस्माइली समुदाय की सामाजिक प्रशासन से जुड़ी संस्थाओं की गतिविधियों पर भी करीबी नजर रखते रहे हैं।
क्यों खास है ये दौरा?
प्रिंस रहीम का भारत दौरा आगा खान फाउंडेशन और भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग की पृष्ठभूमि में हो रहा है। पिछले साल प्रिंस रहीम के पिता प्रिंस करीम आगा खान चतुर्थ का निधन हो गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी व्यक्तित्व बताया था, जिन्होंने अपना पूरा जीवन सेवा और आध्यात्मिकता के लिए समर्पित कर दिया।


