पुलिस अब उस ठेकेदार की तलाश कर रही है जो बेसमेंट में रिसाव की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत का काम करा रहा था। सूत्रों ने बताया कि पुलिस उन परिस्थितियों की जांच कर रही है जिनमें यह काम कराया जा रहा था, और क्या इसके कारण कोई ढांचागत बदलाव हुआ जिससे भवन ढह गया।
सत्य निकेतन में दशकों पुरानी यह इमारत लगभग 55 वर्ग मीटर में फैली थी और इसमें एक बेसमेंट तथा भूतल और चार ऊपरी मंजिलें थीं। बताया जाता रहा है कि प्रत्येक मंजिल पर दो कमरे थे और हर कमरे में दो बिस्तर थे। इस संरचना में खंभे और बीम नहीं थे।
पुलिस ने इमारत की मालकिन 75 वर्षीय उर्मिला गुप्ता, वायु सेवा से सेवानिवृत्त 81 साल के उनके पति हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता (52) को गिरफ्तार कर लिया है। शुरू में हरिराम को संपत्ति का मालिक माना जा रहा था, लेकिन पुलिस ने कहा कि दस्तावेज से पता चला है कि इमारत की मालकिन उर्मिला हैं, जबकि हरिराम और महेश कथित तौर पर पीजी का प्रबंधन संभालते थे।
हॉस्टल डेज को लीज पर दिया हुआ था
दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि कोर्ट ने आरोपी हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में और महेश को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। जांच के दौरान महेश ने बताया कि वह अपने माता-पिता की ओर से बिल्डिंग के रखरखाव का काम देखता था। उन्होंने अगस्त 2025 में यह बिल्डिंग पीजी ऑपरेटर हॉस्टल डेज़ को लीज पर दी थी।





