- ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नया प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया.
- ओमान संग मिलकर जहाजों से टोल वसूला जाएगा.
- भारत के तेल आयात पर असर, छूट की संभावना.
कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं. इस बीच ईरान ने होर्मुज (Strait of Hormuz) में एक नए ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ (Restricted Zone) का ऐलान कर डाला.
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रेजाई ने रविवार को बताया कि यह रेस्ट्रिक्टेड जोन वहां से शुरू होगा, जहां अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी है और यह पूरा जोन होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए फारस की खाड़ी के इलाकों तक फैला होगा. यह घोषणा अमेरिका और ईरान के बीच इस इलाके में एक-दूसरे पर किए गए सिलसिलेवार हमलों के बाद की गई. इस जोन पर ईरान, ओमान के साथ मिलकर काम कर रहा है और दोनों में साथ मिलकर एक ‘नए शिपिंग रूट’ की रूपरेखा भी बताई है.
ईरान का क्या है नया प्लान?
ईरान का कहना है कि अब इस पूरे इलाके से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के साथ तालमेल बनाकर चलना होगा. जो जहाज बिना अनुमति के या उनके बताए गए रूट के बाहर चलेंगे, उन्हें प्रतिबंधित कर दिया जाएगा.
इस रिस्ट्रिक्टेड जोन के तहत ईरान जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक ऐसा सिस्टम बना रहा है, जिसकी तुलना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर मिलने वाले ‘ट्रांजिट वीजा’ से की जा रही है. यानी बिना मंजूरी के जहाज वहां रुक भी नहीं सकते. ईरान इस पूरे रूट को मैनेज करने के साथ यहां से गुजरने वाले जहाजों से सर्विस फीस या टोल टैक्स वसूलने की तैयारी में है, जिसमें ओमान उसका साझीदार है.
दोनों के बीच क्या हुई डील?
ईरान और ओमान ने अगस्त के आखिर में एक अस्थायी समुद्री रास्ते पर सहमति जताई थी, जिसमें ईरानी अधिकारियों का कहना था कि वे इस जलमार्ग के भविष्य पर केवल ओमान से ही सीधे बात करेंगे, जो यह दिखाता है कि ईरान इसमें किसी भी तीसरे देश (जैसे अमेरिका या यूरोपीय देशों) की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं करना चाहता.
अब चूंकि भारत और ओमान के बीच हाल ही में ऐतिहासिक व्यापारिक समझौता (CEPA) हुआ है इसलिए ओमान के साथ ईरान का यह सीधा संवाद भारत के लिए राहत की बात हो सकती है. भारत, ओमान के जरिए इस नए कॉरिडोर में अपने जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता आसानी से सुनिश्चित करवा सकता है.
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा होर्मुज से होकर खाड़ी देशों से आता है. कच्चे तेल के साथ LNG, LPG और अन्य पेट्रोकेमिकल्स भी इसी रूट से मंगाई जाती है. ऐसे में अगर ईरान इस रूट से होकर निकलने वाले जहाजों से महंगा टोल वसूलने लगे, तो यह भारत के लिए एक बड़ा बोझ बन सकता है.
हालांकि, यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि ईरान ने हमेशा भारत को मित्र देश मानते हुए इस रूट से गुजरने वाले किसी भी भारतीय जहाज पर कोई टैक्स, शुल्क या प्रतिबंध नहीं लगाया है. अप्रैल में एक ब्रीफिंग के दौरान राजदूत मोहम्मद फथाली ने पत्रकारों से कहा था, “आप भारत सरकार से पूछ सकते हैं कि क्या हमने अब तक कोई शुल्क लिया है. इस मुश्किल समय में हमारे संबंध अच्छे हैं। हमारा मानना है कि ईरान और भारत के हित और भविष्य एक जैसे हैं.”
क्या ‘सेफ जोन’ में है भारत?
भारत के लिए एक अच्छी बात यह भी है कि भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह का संचालन कर रहा है, जो ईरान की खुद की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है. चूंकि ईरान इस नए कॉरिडोर और रिस्ट्रिक्टेड जोन को ओमान के साथ मिलकर मैनेज कर रहा है और ओमान के साथ भारत का हाल ही में ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (CEPA) हो रखा है, जिसके तहत ओमान ने भारत से जाने वाले 99% सामानों पर टैक्स पूरी तरह से खत्म कर दिया है.
मान लेते हैं कि ईरान पिछली बार की तरह इस बार भी भारत के जहाजों को इस नए ‘टोल टैक्स’ या कड़े प्रतिबंधों से छूट दे देता है, तो भारतीय जहाजों के लिए माल ढुलाई का खर्चउतना नहीं बढ़ेगा जितना अन्य देशों के लिए बढ़ेगा. हालांकि, वैश्विक बाजार में बेशक कच्चे तेल की कीमतों में जो उछाल आएगा, उसका आर्थिक खामियाजा भारत को भी भुगतना पड़ेगा.
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