अगर आपका बच्चा पीजी में रहता है या पीजी में रखने की तैयारी में है तो सिर्फ कमरे की चमक-दमक और कॉलेज की कम दूरी देखना ही पर्याप्त नहीं है। सबसे अधिक जरूरी पीजी की वैधता जांचनी जरूरी है। इसमें बिल्डिंग प्लान से लेकर इमारत के स्वीकृत इस्तेमाल और फायर एनओसी तक शामिल है। किसी अनहोनी की सूरत में कागज ढूंढने से बेहतर है कि पहले से ही आप इन चीजों की पड़ताल कर अपने बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित कर लें।
दिल्ली में अलग-अलग विश्वविद्यालयों के छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतिभागियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनके रिहायश के लिए उचित इंतजाम न होने के कारण बच्चे पीजी की ओर रूख करते हैं। सत्य निकेतन हादसे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि किसी मकान में बेड लगाकर किरायेदार रख देना अपने आप में उस परिसर को वैध पीजी नहीं बना देता।
जानकार बताते हैं कि किसी पीजी की वैधता जांचने के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि रूम कॉलेज या कोचिंग के नजदीक है या नहीं, संपर्क समेत कमरों की हालत और स्वीकृति देखना भी जरूरी है। बड़ा सवाल यह है कि जिस भवन में पीजी चल रहा है, उसका बिल्डिंग प्लान स्वीकृत है या नहीं और एमसीडी ने उसे पीजी के लिए इस्तेमाल की इजाजत दी है? यही नहीं, स्वीकृत नक्शे के मुताबिक निर्माण होने के साथ फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट भी देखना जरूरी है। उसके बाद ही अभिभावक सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा सुरक्षित रिहायश में है या इमारत खतरनाक है।
अभिभावक पीजी मालिकों से करें ये तीन सवाल
भवन का नक्शा स्वीकृत है या नहीं
पीजी का चयन करते वक्त सबसे पहले इमारत का बिल्डिंग प्लान देखना चाहिए। इसमें पता चलता है कि यह कितनी मंजिलें स्वीकृत हैं, कितने क्षेत्र में निर्माण की अनुमति है, सेटबैक और खुली जगह कितनी होनी चाहिए तथा भवन का स्वीकृत उपयोग क्या है। डीडीए के अनुसार, भवन के उपयोग, एफएआर, कवरेज, सेटबैक, ऊंचाई, मंजिलों की संख्या, पार्किंग और रोशनी-वेंटिलेशन जैसे प्रावधानों का उल्लंघन कार्रवाई का आधार बन सकता है।
फायर एनओसी सिर्फ कागज नहीं, सुरक्षा की कसौटी
फायर एनओसी केवल एक औपचारिक दस्तावेज भर नहीं है। दिल्ली फायर सर्विस के नियमों के तहत निर्धारित श्रेणी के भवनों में अग्नि सुरक्षा उपाय और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट आवश्यक हैं। डीडीए के मुताबिक, होटल और गेस्ट हाउस जैसी श्रेणियों में 12 मीटर से अधिक ऊंचाई तथा ग्राउंड+3 से अधिक संरचना होने पर यह सर्टिफिकेट जरूरी है। इसका मतलब यह है कि जांच का सवाल सिर्फ फायर एनओसी है या नहीं? तक सीमित नहीं होना चाहिए। बल्कि पूछा जाना चाहिए कि एनओसी किस श्रेणी के उपयोग के लिए जारी हुई? उस समय भवन की ऊंचाई और मंजिलें कितनी थीं? आज भवन में कितने लोग रह रहे हैं? क्या फायर सेफ्टी सिस्टम मौके पर उसी स्थिति में है, जिस आधार पर प्रमाणपत्र दिया गया था?
एमसीडी की अनुमति किस उपयोग के लिए है?
इसमें यह भी देखना जरूरी है कि एमसीडी ने संबंधित इमारत का इस्तेमाल पीजी के तौर पर करने की अनुमति दी है या नहीं। सिर्फ भवन का निर्माण स्वीकृत होना और उस भवन में व्यावसायिक व आवासीय स्वरूप में पीजी चलाना….दोनों चीजें एक नहीं हैं। इसमें बिल्डिंग प्लान क्या कहता है? इमारत का स्वीकृत उपयोग क्या है? और वास्तव में भवन में क्या गतिविधि चल रही है? इन तीनों में अंतर है तो इस इमारत में चल रही पीजी में रखना सुरक्षित नहीं हो सकता है।


