पाकिस्तान लगातार बांग्लादेश को अपनी तरफ करने के लिए उससे नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. इस बीच भारत और बांग्लादेश ने रविवार (6 सितंबर) को सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की. इसमें शास्त्रीय संगीत, लोक कला और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में आदान-प्रदान शामिल है. इसमें खासकर क्रांतिकारी कवि काजी नजरुल इस्लाम की विरासत संभालने को लेकर बात की गई है.
ढाका में भारतीय उच्चायोग की एक सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने रविवार को बांग्लादेश के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री निताई रॉय चौधरी से मुलाकात की और दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा की.
‘सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने पर जोर’
भारतीय उच्चायोग ने बताया कि बातचीत में दोनों पड़ोसी देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने पर जोर दिया गया. बैठक में सांस्कृतिक मामलों के राज्य मंत्री अली नवाज महमूद खय्याम भी मौजूद थे. दोनों पक्षों ने शास्त्रीय संगीत, लोक कला, विरासत संरक्षण, संस्थागत जुड़ाव और संयुक्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों व सम्मेलनों के क्षेत्रों में संभावित सहयोग पर चर्चा की.
बता दें कि ये सभी गतिविधियां ‘नजरुल बोर्शो’ समारोह के तहत लोगों के बीच आपसी संबंध बढ़ाने के मकसद से आयोजित की जा रही हैं. बांग्लादेश में देश के राष्ट्रीय कवि की 127वीं जयंती मनाने के लिए 25 मई, 2026 से 25 मई, 2027 तक ‘नजरुल बोर्शो’ यानी ‘नजरुल वर्ष’ मनाया जा रहा है.
कौन थे विद्रोही कवि नजरुल इस्लाम?
विद्रोही कवि के नाम से मशहूर नजरुल का जन्म 1899 में मौजूदा पश्चिम बंगाल के चुरुलिया में हुआ था. उनकी रचनाओं में आज़ादी, समानता, ज़ुल्म के खिलाफ आवाज उठाने और सांप्रदायिकता के विरोध की बात कही गई थी. साथ ही भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनके गाने और कविताएं बंगाल के सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन का अहम हिस्सा बन गए थे.
पश्चिम बंगाल आधिकारिक तौर पर उनकी जयंती मनाता है, जबकि चुरुुलिया नजरुल अकादमी के जरिए उनकी यादों को संजोए हुए हैं. उनके ‘नजरुल गीति’ बंगाल की संगीत विरासत का एक अहम हिस्सा है. पूरे साल चलने वाले ‘नजरुल बोर्षो’ आयोजन का मकसद बांग्लादेश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रमों के जरिए उनकी साहित्यिक, संगीत और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करना है.
ये भी पढ़ें
PAK बॉर्डर के नजदीक क्या हो रहा, गुस्से में आए ओवैसी, बोले- ‘मुसलमानों के…’


