जर्मनी के पूर्वी राज्य सैक्सोनी-आनहाल्ट में हुए क्षेत्रीय चुनाव में दक्षिणपंथी पार्टी Alternative for Germany (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की है. पार्टी करीब 44 फीसदी वोट के साथ राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है. हालांकि इतनी बड़ी जीत के बाद भी AfD अपने दम पर सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत हासिल नहीं कर पाई. 83 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 42 सीटें चाहिए, जबकि AfD को 39 सीटें मिलने का अनुमान है. ऐसे में अब राज्य में सरकार कैसे बनेगी, इसको लेकर तस्वीर साफ नहीं है.
2021 के मुकाबले दोगुने से ज्यादा वोट
रॉयटर्स के मुताबिक, AfD को इस चुनाव में करीब 44 फीसदी वोट मिल सकते हैं. 2021 के चुनाव में पार्टी को सिर्फ 23.7 फीसदी वोट मिले थे. यानी इस बार उसके वोट शेयर में दोगुने से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की पार्टी Christian Democratic Union (CDU) करीब 18 फीसदी वोट के साथ काफी पीछे रह गई. AfD को 83 सदस्यीय विधानसभा में 39 सीटें मिलने का अनुमान है. बहुमत से वह सिर्फ तीन सीट दूर है.

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AfD के लिए सरकार बनाना आसान नहीं
सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद AfD के सामने सरकार बनाने की मुश्किल है. पार्टी ने किसी दूसरी पार्टी के साथ गठबंधन करने से इनकार किया है. दूसरी ओर, जर्मनी की मुख्यधारा की पार्टियां भी AfD के साथ सरकार बनाने या सहयोग करने से दूरी बनाए हुए हैं. AfD के 35 वर्षीय उम्मीदवार उलरिच जीगमुंड ने नतीजों को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा कि लोगों ने साफ संदेश दिया है कि अब चीजें इसी तरह नहीं चल सकतीं. उन्होंने समर्थकों से कहा, हमने इस राज्य में इतिहास रच दिया है. AfD की सह-नेता एलिस वीडेल ने नतीजे को सरकार बनाने के लिए साफ जनादेश बताया.
जरूरत पड़ी तो फिर चुनाव की बात
जीगमुंड ने कहा कि उनकी पार्टी बदलाव चाहने वाली राजनीतिक ताकतों से बात करने के लिए तैयार है. हालांकि, पार्टी फिलहाल अल्पमत सरकार बनाने के पक्ष में भी नहीं दिख रही है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार नहीं बनती है तो दोबारा चुनाव हो सकता है. उनका दावा है कि ऐसी स्थिति में AfD को 50 से 55 फीसदी वोट तक मिल सकते हैं. जीगमुंड पहले CDU में थे, लेकिन बाद में AfD में शामिल हो गए. जर्मन पत्रिका Der Spiegel ने उन्हें जर्मनी का सबसे खतरनाक आदमी तक कहा है. उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान फ्रेडरिक मर्ज पर तंज कसते हुए कहा कि मर्ज AfD के लिए बहुत अच्छे प्रचारक साबित हुए.
इमिग्रेशन और सुरक्षा बड़े मुद्दे
चुनाव प्रचार के दौरान AfD ने इमिग्रेशन और घरेलू सुरक्षा को सबसे अहम मुद्दों में रखा. पार्टी रीमाइग्रेशन नीति का समर्थन करती है. आलोचक इसे बड़े पैमाने पर लोगों को देश से बाहर भेजने की नीति से जोड़ते हैं. वहीं AfD का कहना है कि इसका मतलब अपराधियों और जर्मनी में गैरकानूनी तरीके से रह रहे लोगों को बाहर भेजना है. सैक्सोनी-आनहाल्ट में पार्टी ने डेसाऊ के Bauhaus School की भी आलोचना की और इसे आधुनिकतावाद का गतिरोध बताया.
नाजी इतिहास पर भी विवाद
AfD के थुरिंगिया नेता ब्योर्न हॉके भी अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं. 2017 में उन्होंने बर्लिन के होलोकॉस्ट स्मारक को शर्म का स्मारक कहा था और जर्मनी को नाजी इतिहास को लेकर लगातार माफी मांगने की सोच से बाहर आने की बात कही थी. 2023 में उन्होंने यूरोपीय संघ को लेकर भी विवादित बयान दिया था. 2019 में एक जर्मन अदालत ने कहा था कि हॉके को फासीवादी कहना मानहानि नहीं है.
CDU को बड़ा झटका, मर्ज पर भी दबाव
इस चुनाव में CDU को बड़ा झटका लगा है. पार्टी 2002 से सैक्सोनी-आनहाल्ट में सत्ता में रही है, लेकिन इस बार उसका वोट शेयर पिछले चुनाव के मुकाबले आधे से भी ज्यादा गिर गया. CDU के राज्य प्रमुख स्वेन शुल्जे ने हार स्वीकार की और कहा कि चुनाव अभियान बेहद कठिन था. पार्टी ने साफ किया कि वह AfD के साथ सहयोग नहीं करेगी.
CDU महासचिव फ्रांजिस्का हॉपरमैन ने भी इसे पार्टी की हार बताया. चुनाव नतीजों से चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पर भी दबाव बढ़ सकता है. एक हालिया सर्वे में सिर्फ 9 फीसदी लोगों ने उनकी राजनीति से संतुष्टि जताई थी. वहीं जीगमुंड ने एक बार फिर मर्ज पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव प्रचार में उन्होंने AfD की मदद कर दी.

