फ्रांस की राजधानी पेरिस में रविवार को देश का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बीएपीएस अक्षरधाम संस्थान के गुरु महंतस्वामी महाराज ने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को पूरा किया। इसमें यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और एशिया से आए संतों, भक्तों और गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया।

मंदिर का निर्माण प्राचीन भारतीय वास्तुकला और वैदिक शिल्पशास्त्र के आधार पर किया गया है। इसमें फ्रांसीसी आधुनिक तकनीक का भी सुंदर मेल देखने को मिलता है। 13 दिनों तक चले इस महोत्सव में 40 से अधिक देशों से लोग शामिल हुए। प्रतिष्ठा से पहले पेरिस में एक भव्य नगर यात्रा निकाली गई।
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14 रथों में निकली यात्रा
यात्रा में 14 सुसज्जित रथों पर हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां सजाई गईं। पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुतियां दीं। यात्रा एफिल टावर और एकोल मिलिटेर से होते हुए प्लास द ला कॉनकॉर्ड तक पहुंची। यात्रा ने फ्रांस में भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म का नया अध्याय खोल दिया। यह मंदिर 5000 वर्गमीटर क्षेत्र में फैला है। ऊपरी तल पर पारंपरिक मंदिर और नीचे सांस्कृतिक केंद्र के रूप में हवेली बनाई गई है।
पीएम मोदी ने वीडियो संदेश में क्या कहा?
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रभुपाद ने भारत के सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव के पुनर्जागरण का अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भी एक भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। यह निर्माण संतों की संकल्प शक्ति का प्रमाण है।
उन्होंने कहा, बीएपीएस स्वामी नारायण संस्था और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर बधाई दी गई। बीएपीएस मंदिरों से भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य प्रसारित होते हैं। यह मंदिर फ्रांस की विविधता को समृद्ध करेगा और सांस्कृतिक संबंधों को ऊर्जा देगा। भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। दोनों देश राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मिलकर विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी बना रहे हैं।
सांस्कृतिक और रणनीतिक साझेदारी
उन्होंने कहा, यह साझेदारी पुराने सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी जीवित है। फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमा रोला की लेखनी समाजों को करीब लाई।
मेड इन इंडिया, बिल्ट इन फ्रांस
प्रधानमंत्री ने कहा, दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी ने फ्रांस आकर आध्यात्मिक संबंधों का नया अध्याय शुरू किया था। आज योग भी भारत और फ्रांस के लोगों के बीच जुड़ाव का एक अहम जरिया बन चुका है। यह स्वामी नारायण मंदिर मेड इन इंडिया है और बिल्ट इन फ्रांस है। इसके पत्थर भारत में तराशे गए हैं। भारत की प्राचीन प्रतिभा फ्रांस की आधुनिक इंजीनियरिंग से जुड़कर इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। यह मंदिर सदियों तक दोनों देशों के बीच सहयोग और संभावनाओं का प्रतीक बनेगा और सेवा प्रकल्पों का केंद्र होगा।

