अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के अवसर पर बंगलूरू में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर शामिल हुए।
राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि जश्न मनाने की बड़ी वजह अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होना है। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें भारत पीछे देखने के लिए नहीं भेजा है। उन्हें काम करने और आगे देखने के लिए भारत भेजा गया है। उन्होंने कहा कि उनका ध्यान असली नतीजों पर है। ये नतीजे अमेरिका और भारत, दोनों देशों के आम लोगों के लिए होने चाहिए।

बंगलूरू को क्यों बताया खास?
सर्जियो गोर ने कहा कि इस बारे में बात करने के लिए बेंगलुरु बिल्कुल सही जगह है। यह शहर काम करता है। काम पूरा करता है। इंतजार नहीं करता।
उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन भी इसी तरह काम करता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत-अमेरिका संबंधों में यही सोच लेकर आए हैं। एक राजदूत के तौर पर मैंने भी हर दिन इसी सोच के साथ काम करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि हर हफ्ते दोनों देशों के लिए ऐसे काम तलाशे जाते हैं, जिनमें दोनों का फायदा हो।
ट्रस्ट फेलोशिप क्या है?
सर्जियो गोर ने कहा, आज रात ट्रस्ट फेलोशिप शुरू करने में मदद करने पर मुझे गर्व है। यह अमेरिका और भारत के बीच नई साझेदारी है। इसमें अमेरिका और भारत के बड़े शोधकर्ता साथ काम करेंगे। वे इस सदी की अहम तकनीकों पर काम करेंगे। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी शामिल हैं।

राजदूत गोर ने कहा कि कोई भी क्षेत्र चुन लीजिए। अमेरिका और भारत उसमें साथ काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार हो रहा है। एयरोस्पेस में काम हो रहा है। सैन्य अभ्यास हो रहे हैं। रक्षा सामान की खरीद-बिक्री भी हो रही है। उन्होंने कहा कि क्या आपको पता है कि भारत अमेरिका के साथ किसी भी दूसरे देश से ज्यादा सैन्य अभ्यास करता है? उन्होंने दवा उद्योग और अंतरिक्ष क्षेत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में भारत और अमेरिका रिकॉर्ड स्तर पर साथ काम कर रहे हैं।
डीके शिवकुमार ने क्या कहा?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि हाल ही में मैसूर में प्रधानमंत्री के साथ उनका एक कार्यक्रम था। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा था कि दुनिया बंगलूरू के जरिये भारत को देख रही है। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग भारत के बारे में नहीं जानते। लेकिन वे बंगलूरू और कर्नाटक को जानते हैं। इसकी वजह यहां की प्रतिभा और मिलने वाला सहयोग है।

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कर्नाटक में कितने इंटरनेशनल स्कूल?
डीके शिवकुमार ने कहा कि आज भारत में 140 इंटरनेशनल स्कूल हैं। इनमें 38 कर्नाटक में हैं। इन स्कूलों में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए छात्र पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और शोध के क्षेत्र में और गहरी साझेदारी चाहता है। इसका फायदा युवाओं को मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगलूरू में पूरी तरह काम करने वाले अमेरिकी कॉन्सुलेट की स्थापना से भारत और अमेरिका के संबंध और मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि वह इस मौके का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। शिवकुमारने कहा कि बंगलूरू के लोगों को अमेरिकी कॉन्सुलेट की सेवाओं के लिए चेन्नई या मुंबई जाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

