सागर जिले के बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद राजनीतिक पारा चढ़ गया है। इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रदेश से लेकर स्थानीय स्तर तक विपक्षी नेता सरकार की आबकारी नीति और स्थानीय प्रशासनिक नाकामी पर लगातार तीखे हमले कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने खुले तौर पर पुलिस, आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन पर शराब माफिया के साथ मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं।

सागर में मौतों पर गरमाई राजनीति
घटना पर गहरा आक्रोश जताते हुए पूर्व विधायक तरवर सिंह लोधी ने कहा कि यह पूरी त्रासदी शासकीय मशीनरी की विफलता का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग की शह पर अधिकृत ठेकेदार ही शराब दुकानों की आड़ में अधिक मुनाफे के लालच में जहरीली शराब बिकवा रहे हैं।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
कांग्रेस के पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ने सरकार की नाकामी पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की पारदर्शी व निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, आम आदमी पार्टी के संयुक्त सचिव लक्ष्मीकांत राज ने सरकार से इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि सरकार को मृतकों के आश्रितों को तुरंत 50-50 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करनी चाहिए।
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मौतों की संख्या पर बना संशय, छिपाया जा रहा सच
इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन जहां अब तक 10 मौतों की पुष्टि कर रहा है, वहीं विपक्षी नेताओं का दावा है कि कम से कम 15 लोगों की जान जा चुकी है। तमाम हंगामे के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों का रवैया बेहद गोपनीयता से भरा हुआ है। मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी (कलेक्टर) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) केवल मौतों का आंकड़ा बता रहे हैं, लेकिन अब तक मृतकों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है। प्रशासनिक अमला पूरी जानकारी को सार्वजनिक करने से बचता नजर आ रहा है।