भारत के छोटे शहरों में सबसे ज्यादा होम लोन लिए जाते हैं, यहां पर लोग सबसे ज्यादा घर भी बना रहे हैं. ये बढ़ती हुई मांग देश में होम लोन का कारोबार बढ़ा रही है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि SGA PR की रिपोर्टमें ये बात सामने आई है.
हाउसिंग फाइनेंस इन इंडिया- द साइलेंट जाइंट ऑफ रिटेल क्रेडिट के मुताबिक, देश में होम लोन के करीब 64% वॉल्यूम टियर-II और टियर-III शहरों से आ रहे हैं. इन शहरों में 2025 के दौरान होम लोन की मांग एक साल पहले के मुकाबले 81% बढ़ी. छोटे शहरों में बढ़ती आय, बेहतर सड़क और दूसरी सुविधाएं, रोजगार के नए मौके और तेजी से हो रहा शहरीकरण लोगों को अपना घर खरीदने के लिए इंस्पायर कर रहे हैं.
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मेट्रो सिटी के मुकाबले आसान है घर खरीदना
बड़े शहरों में पिछले कुछ सालों में घरों की कीमतें काफी बढ़ी हैं. इससे आम परिवारों की आय और घर की कीमत के बीच अंतर बढ़ गया है. इसके मुकाबले छोटे शहरों और कस्बों में घर अपेक्षाकृत सस्ते मिल जाते हैं. इसलिए पहली बार घर खरीदने वाले लोगों के लिए छोटे शहर तेजी से पसंदीदा बन रहे हैं.
हालांकि, छोटे शहरों में बैंकों और वित्तीय कंपनियों के लिए कुछ चुनौतियां भी हैं. यहां कई कस्टमर्स ऐसे होते हैं जो स्वरोजगार वाले होते हैं या उनकी आय का रिकॉर्ड सामान्य नौकरीपेशा लोगों जैसा नहीं होता. ऐसे ग्राहकों की लोन चुकाने की क्षमता चेक करना केवल सैलरी स्लिप देखने से संभव नहीं होता.

डिजिटल हो रहा होम लोन
होम लोन लेने की प्रक्रिया भी तेजी से डिजिटल हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में करीब 60% हाउसिंग फाइनेंस एप्लीकेशन डिजिटल तरीके से प्रोसेस किए जाते थे. 2024 तक ये आंकड़ा बढ़कर करीब 92% हो गया. अब ग्राहक घर बैठे लोन देने वाली कंपनियों की जानकारी ले सकते हैं, अपनी पात्रता चेक कर सकते हैं, दस्तावेज जमा कर सकते हैं और लोन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. इससे छोटे शहरों के ग्राहकों को भी कई लेंडर्स तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है.
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छोटे शहर सबसे बड़ी ताकत
देखा जाए तो भारत का होम लोन बाजार केवल ब्रांच से एप की ओर नहीं बढ़ रहा है. आने वाले समय में डिजिटल तकनीक के साथ इंसानी मदद भी जरूरी रहेगी. खासकर प्रॉपर्टी की जांच, स्वरोजगार वाले ग्राहकों और छोटे शहरों के स्थानीय बाजार को समझने में इंसानों की भूमिका भी जरूरी होगी. ऐसे में भारत के छोटे शहर आने वाले वर्षों में होम लोन कारोबार की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं.
