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पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा, उज्बेकिस्तान ने खरीद डाले चीनी J-10 फाइटर जेट

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ऑपरेशन सिंदूर पर चीन-पाकिस्तान के दुष्प्रचार में फंसकर उज्बेकिस्तान ने चीन के सस्ते लड़ाकू विमान खरीद लिए हैं. पिछले हफ्ते, अपने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उज्बेकिस्तान ने चीन से खरीदे गए जे-10 लड़ाकू विमानों की पहली खेप को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया. 

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, चीन-पाकिस्तान ने झूठा-सच्चा प्रोपेगेंडा गढ़ा था कि जे-10 ने भारत के रफाल फाइटर जेट को गिरा दिया है. 1 सितंबर को उज्बेकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मनाया गया. इस खास आयोजन के लिए उज्बेकिस्तान के नेशनल टीवी चैनल पर एक कार्यक्रम प्रसारित किया गया, जिसमें पहली बार चीन के जे-10 सीई फाइटर जेट को दिखाया गया.

जे-10 फाइटर जेट को वॉटर-कैनन से सैल्यूट 

कार्यक्रम में दिखाया गया कि चीन से आए छह (06) जे-10 फाइटर उज्बेकिस्तान के एक एयरबेस पर उतरते हैं. उतरने के बाद उन्हें वॉटर-सैल्यूट दिया जा रहा है. जैसा कि सैन्य परंपरा होती है, ठीक वैसे वॉटर-कैनन से ये सैल्यूट दिया गया. जानकारी के मुताबिक, उज्बेकिस्तान ने कुल 24 चीनी फाइटर जेट खरीदे हैं. इस सौदे की कुल कीमत करीब एक (01) अरब डॉलर है यानी करीब 9500 करोड़ भारतीय रूपये है. ऐसे में उज्बेकिस्तान को ये डील बेहद सस्ती पड़ी है. 

इसके मायने ये है कि उज्बेकिस्तान को एक जे-10 250 करोड़ से भी कम में पड़ा है. हालांकि यह, साफ नहीं है कि चीन ने इस पैकेज (डील) में जे-10 की मिसाइल और दूसरे हथियार भी शामिल किए हैं. पाकिस्तान के बाद उज्बेकिस्तान दूसरा देश है जिसने चीन के चेंगदू फाइटर जेट को खरीदा है. चीन की पीएलए (एयर फोर्स) पिछले दो दशक से जे-10 को ऑपरेट कर रही है.

2021 में पाकिस्तान ने खरीदे

वर्ष 2021 में पाकिस्तान ने चीन से 25 चेंगदू फाइटर जेट खरीदे थे. ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन-पाकिस्तान ने प्रोपेगेंडा फैलाया था कि जे-10 ने भारत के रफाल फाइटर जेट को गिराया है. जिससे प्रभावित होकर उज्बेकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों का मन जे-10 पर आ गया. बांग्लादेश भी चीन से बीस (20) जे-10 खरीदने की तैयारी कर रहा है. जबकि सच्चाई ये है कि पाकिस्तान कभी भी रफाल फाइटर जेट को गिराने के सबूत पेश नहीं कर पाया है. 

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन की सरकारी मीडिया ने भी रफाल फाइटर जेट गिरने की झूठी-सच्ची थ्योरी का प्रचार-प्रसार किया था. हालांकि, बाद में चीनी मीडिया ने अपने दावों को वापस भी ले लिया था. जे-10, जिसे चेंगदू के नाम से भी जाना जाता है, अमेरिका के एफ-16 की कॉपी है. चीन ने इसे Vigorous-Dragon का नाम भी दिया है. ये सिंगल-इंजन मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे रडार, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और उन्नत डेटा-लिंक क्षमताओं से लैस है. ये लड़ाकू विमान पीएल-10 शॉर्ट-रेंज मिसाइल और पीएल-15 ई बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (बीवीआर) रडार-गाइडेड मिसाइल से लैस है.

रफाल की तुलना में सस्ता है जे-10

जानकारों का मानना है कि जे-10सीई, यूरोप के टाइफून या फिर फ्रांस के रफाल (राफेल) जैसे पश्चिमी लड़ाकू विमानों की तुलना में बेहद सस्ता साबित हुआ है. वर्ष 2016 में भारत ने जो रफाल फाइटर जेट फ्रांस से खरीदे थे, उस सौदे की कुल कीमत करीब 59 हजार करोड़ थी. इस सौदे में भारत ने फ्रांस से कुल 36 रफाल लड़ाकू विमान खरीदे थे. ऐसे में एक रफाल की कीमत करीब 1600 करोड़ मान सकते हैं. लेकिन उस डील में रफाल की मिसाइल और दूसरे हथियार भी शामिल थे. 

इसके अलावा, ये रफाल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है, जिसका प्रदर्शन हाल में फ्रांस ने अपने देश में किया है. यहां ये भी बताना जरूरी है कि पिछले हफ्ते, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दो दिवसीय आधिकारिक दौरे  पर उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद गए थे. इस दौरान, दोनों देशों के बीच यूरेनियम सहित 11 समझौतों पर करार किया गया. 

इनमें आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, माइनिंग, शिक्षा और आयुर्वेद से जुड़े क्षेत्रों पर करार किया गया. यानी भारत के उज्बेकिस्तान से सामान्य संबंध हैं और भारत को इन जे-10 फाइटर जेट से कोई खासी परेशानी नहीं होने जा रही है. लेकिन चीन और उज्बेकिस्तान की ये जे-10 डील दर्शाती है कि कैसे फेक-नैरेटिव और प्रोपेगेंडा के जरिए बड़े-बड़े देश भी शिकार हो जाते हैं.

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