वैश्विक बाजारों में आई भारी बिकवाली और घरेलू मोर्चे पर बदले घटनाक्रमों के बीच मंगलवार को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोने की कीमत लगातार पांचवें दिन गिरते हुए 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गई। केवल एक दिन में सोने के भाव में 2,700 रुपये प्रति 10 ग्राम की भारी कटौती दर्ज की गई है। पांच दिनों से जारी इस गिरावट ने निवेशकों और आभूषण खरीदारों के बीच हलचल मचा दी है। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने सर्राफा बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है, इसके चलते घरेलू बाजार में यह हालिया हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गया है।
आज सोने और चांदी के भाव में कितनी बड़ी गिरावट आई है?

स्थानीय सर्राफा डीलरों और कारोबारियों के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 2,700 रुपये गिरकर 1,58,200 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर बंद हुई। यह सोने का लगभग दो सप्ताह का निचला स्तर है। इससे पहले सोमवार को सोना 1,60,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि सोना ठीक इसी तरह के निचले स्तर पर पिछले महीने 19 अगस्त को देखा गया था, जब इसकी कीमत 1,58,000 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई थी।
केवल सोना ही नहीं, बल्कि चांदी की चमक भी आज फीकी पड़ गई है। दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 5,000 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी गिरावट के साथ 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर आ गई। सोमवार को चांदी बिना किसी उतार-चढ़ाव के 2,45,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। इस तरह सोने के साथ-साथ चांदी में भी बिकवाली का भारी दबाव देखा जा रहा है।
पिछले पांच दिनों में निवेशकों को कितना नुकसान हुआ है?
सोने की कीमतों में जारी यह गिरावट केवल एक दिन की कहानी नहीं है, बल्कि पिछले पांच सत्रों से यह लगातार नीचे की ओर फिसल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच कारोबारी सत्रों में सोने की कीमतों में कुल 8,900 रुपये प्रति 10 ग्राम या 5.3 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। बीते 25 अगस्त को सोने की कीमत अपने रिकॉर्ड 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर थी, जहां से अब यह घटकर 1,58,200 रुपये पर आ गई है। इस बड़ी गिरावट ने अल्पावधि के निवेशकों के मुनाफे को काफी हद तक घटा दिया है और बाजार में बिकवाली का माहौल बना दिया है।
वैश्विक बाजार में बिकवाली की मुख्य वजह क्या है?
भारतीय सर्राफा बाजार में आई इस गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मची हलचल सबसे प्रमुख कारण है। विदेशी बाजारों में सोने पर भारी दबाव देखा गया। हाजिर सोना वैश्विक बाजारों में 2 प्रतिशत या 80.61 डॉलर की बड़ी गिरावट के साथ 4,368.58 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं वैश्विक स्तर पर चांदी भी लगभग 3 प्रतिशत टूटकर 64.68 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स लिमिटेड की कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने बताया कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है। तेल की बढ़ती कीमतों से वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं। इस महंगाई की आशंका ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों, विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी दृष्टिकोण की ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया है। जब महंगाई बढ़ने की आशंका होती है, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी का डर बढ़ जाता है, जिससे सोने जैसे बिना ब्याज वाले सुरक्षित निवेश साधन की मांग कमजोर होने लगती है और इसकी कीमतों पर दबाव बनता है।
फेडरल रिजर्व की नीतियों का सोने पर क्या असर हो रहा है?
मिराए एसेट शेयरखान के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह के अनुसार, वैश्विक बाजारों में हाजिर सोना दो प्रतिशत गिरकर लगभग 4,370 डॉलर प्रति औंस पर मंडरा रहा है। इसका बड़ा कारण पिछले सप्ताह जैक्सन होल सिम्पोजियम में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श का दिया गया सख्त भाषण है। इस भाषण ने निवेशकों के बीच इस बात की संभावना को बहुत बढ़ा दिया है कि आने वाले समय में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रखा जा सकता है।
प्रवीण सिंह ने आगे बताया कि बाजार के प्रतिभागी अब 16 सितंबर को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक में अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 60 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं। चूंकि ऊंची ब्याज दरें सोने को रखने की अवसर लागत को बढ़ा देती हैं, इसलिए निवेशक सोने से पैसा निकालकर अन्य वित्तीय साधनों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे सोने में वैश्विक बिकवाली हो रही है।
पीएम मोदी की स्वदेशी अपील का घरेलू बाजार पर क्या असर पड़ा?
इस वैश्विक दबाव के बीच सोने की कीमतों पर घरेलू स्तर पर भी एक नया भावनात्मक प्रभाव पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान से एक इंस्टाग्राम वीडियो जारी कर देशवासियों से एक विशेष अपील की है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, सोने की खरीदारी करने से बचें। प्रधानमंत्री ने देश की आत्मनिर्भरता और स्वदेशी को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने नागरिकों से विदेशी छुट्टियों पर जाने, विदेशों में शादियां आयोजित करने और अनावश्यक रूप से सोने की खरीदारी करने से बचने को कहा ताकि देश की पूंजी बाहर न जाए।
इस घरेलू भावनात्मक पहलू पर विश्लेषण देते हुए आनंद राठी की एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन टिप्पणियों का अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों पर कोई सीधा या बड़ा असर होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, यह घरेलू बाजार के सेंटीमेंट को जरूर प्रभावित कर सकता है। इससे आगामी त्योहारी सीजन में घरेलू आभूषणों की मांग और ग्राहकों की उम्मीदों पर दबाव पड़ सकता है, जिससे अल्पावधि में भारतीय बाजार में सोने की मांग कुछ कम हो सकती है।
निवेशकों के लिए आगे कौन से आर्थिक आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे?
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटीज) सौमिल गांधी ने बताया कि सोने के निवेशकों की नजरें अब अमेरिकी आर्थिक कैलेंडर के महत्वपूर्ण आंकड़ों पर टिकी हैं। मंगलवार और बुधवार को अमेरिका के मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) और सर्विसेज (सेवा) सेक्टर की गतिविधियों के आंकड़े जारी होने वाले हैं। इसके बाद, शुक्रवार को अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण अगस्त महीने का नॉन-फार्म पेरोल (रोजगार) डेटा जारी किया जाएगा। ये आर्थिक आंकड़े अमेरिका की अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति साफ करेंगे और इसी के आधार पर तय होगा कि फेडरल रिजर्व 16 सितंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाएगा या नहीं। यदि आंकड़े मजबूत आते हैं, तो ब्याज दरें बढ़ने की आशंका और पुख्ता होगी, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

