शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई. दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब 2020 में गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में तनाव रहा है.
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित SCO सम्मेलन के दौरान दोनों नेता एक साथ नजर आए. इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी वहां मौजूद थे. सम्मेलन से पहले प्रतिनिधि देशों के नेताओं ने ग्रुप फोटो के लिए मुलाकात की, जहां पीएम मोदी ने शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं से हाथ मिलाया.
Indian PM Modi meets Chinese Prez Xi, Russian Prez Putin, Iran Prez Masoud Pezeshkian at SCO summit pic.twitter.com/mpoPgvczan
— OSINT Digest (@Indowatchosint) September 1, 2026
गलवान झड़प के बाद रिश्तों में आया था तनाव
भारत और चीन के संबंधों में जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद बड़ा बदलाव आया था. इस घटना में दोनों देशों के सैनिकों के बीच तनाव बढ़ गया था. इसके बाद सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ी और दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई. ऐसे माहौल में मोदी और शी की मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ भी रहे मौजूद
SCO सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी शामिल हुए. नेताओं के ग्रुप फोटो के दौरान वह भी वहां मौजूद थे. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उस मौके पर पीएम मोदी और शरीफ के बीच कोई खास बातचीत या मुलाकात नहीं हुई. SCO में भारत और पाकिस्तान दोनों पूर्ण सदस्य हैं और दोनों देश इस मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर हिस्सा लेते हैं. हालांकि, इस दौरान एक अलग नजारा देखने को मिला, जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पुतिन से बात करने लगे तो तुरंत रूसी राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड दौड़कर पास में पहुंच गए.
#WATCH | Bishkek, Kyrgyzstan: Prime Minister Narendra Modi interacts with Chinese President Xi Jinping as they participate in the 26th SCO Summit.
(Source: Host Broadcaster via Reuters) pic.twitter.com/0I1khkxtum
— ANI (@ANI) September 1, 2026
क्या है SCO?
शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी. इसकी शुरुआत चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी. भारत और पाकिस्तान वर्ष 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने. इसके बाद ईरान 2023 और बेलारूस 2024 में संगठन में शामिल हुए. SCO का मुख्य फोकस क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सदस्य देशों के बीच संपर्क बढ़ाने पर है.
एक दिन पहले पुतिन से भी मिले थे पीएम मोदी
SCO सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की. बैठक में दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध का मुद्दा उठाया. पीएम मोदी ने युद्ध को जल्द खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि युद्ध का हर दिन मानवता को नुकसान पहुंचाता है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत शांति की दिशा में होने वाले सभी प्रयासों का समर्थन करता है. बैठक में भारत और रूस के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा हुई.

भारत के लिए SCO कितना महत्वपूर्ण?
SCO भारत के लिए मध्य एशिया, रूस और चीन समेत कई महत्वपूर्ण देशों के साथ बातचीत का बड़ा मंच है. भारत इस मंच के जरिए सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखता है. ऐसे में पीएम मोदी की शी जिनपिंग और पुतिन से मुलाकातें भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं.

