देश में नई और तेजी से फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की पहचान अब दूरदराज के इलाकों में भी पहले से जल्दी हो सकेगी। सरकार ने अगले पांच साल में 732.304 करोड़ रुपये से देश के हर हिस्से में वायरल बीमारियों की जांच के लिए नेटवर्क बनाने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार उन इलाकों में नई प्रयोगशालाएं स्थापित करने पर जोर दे रही है, जहां अभी संक्रामक बीमारियों की उन्नत जांच की पर्याप्त सुविधा नहीं है।
अब तक इस नेटवर्क में मेडिकल कॉलेजों और शोध संस्थानों की बड़ी भूमिका रही है। अब सरकार व्यवस्था को जिला स्तर तक ले जाने की संभावना पर काम कर रही है। हालांकि, भी संख्या तय नहीं हुई है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में 167 वायरस अनुसंधान एवं निदान प्रयोगशालाएं काम कर रही हैं।
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सीमावर्ती इलाकों पर नजर
सरकार दूरदराज और कम सुविधा वाले क्षेत्रों को लेकर खासतौर पर चिंतित है। पूर्वोत्तर राज्यों, लद्दाख और लक्षद्वीप जैसे इलाकों में अब भी जांच सुविधा के विस्तार की जरूरत बताई गई है। इन क्षेत्रों में संस्थानों की उपलब्धता कम होने पर मौजूदा नियमों में विशेष प्रावधान करने की सिफारिश की गई है। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अनुसार, इन क्षेत्रों में प्रयोगशालाओं के लिए प्रस्ताव मिल रहे हैं। लेह, दादरा एवं नगर हवेली और नागालैंड के प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन हैं।
