मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। झांसी से भोपाल रेफर किए गए 16 वर्षीय किशोर की विदिशा के पास एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से मौत हो गई। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। घटना ने निजी एंबुलेंस सेवाओं की व्यवस्था और जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृतक की पहचान 16 वर्षीय भरत अहिरवार के रूप में हुई है। वह मूल रूप से छतरपुर जिले का रहने वाला था। उसके पिता बाबूलाल परिवार के साथ दिल्ली के गाजियाबाद में रहकर मजदूरी करते हैं।
परिजनों के मुताबिक, भरत ने करीब एक महीने पहले जहरीला पदार्थ खा लिया था। इसके बाद गाजियाबाद में उसका इलाज चला। तबीयत में कुछ सुधार होने पर परिवार उसे वापस गांव ले आया, लेकिन कुछ दिन बाद उसकी हालत फिर बिगड़ने लगी। गंभीर स्थिति में परिजन उसे झांसी के अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसकी नाजुक हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए भोपाल रेफर कर दिया।
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परिवार भरत को एंबुलेंस से झांसी से भोपाल ले जा रहा था। बुधवार दोपहर एंबुलेंस जब विदिशा के पास पहुंची, तभी उसमें मौजूद ऑक्सीजन खत्म हो गई। परिजनों ने ड्राइवर को इसकी जानकारी दी, लेकिन तब तक भरत की हालत बिगड़ने लगी। आनन-फानन में एंबुलेंस को विदिशा मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
बताया जा रहा है कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर पूरी तरह भरा नहीं था और लंबी दूरी तय करने के दौरान रास्ते में ही ऑक्सीजन खत्म हो गई। आरोप है कि एंबुलेंस की पर्याप्त जांच किए बिना ही उसे लंबी दूरी के लिए रवाना किया गया। इस मामले में निजी एंबुलेंस सेवाओं की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल विदिशा मेडिकल कॉलेज पुलिस चौकी ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। बुधवार दोपहर करीब 2 बजे पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

