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ईरान की तबाही से डरे खाड़ी मुल्क 40000 KM दूर ‘दोस्त’ के पास पहुंचे, मांगे ये खतरनाक हथियार

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यूएस-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि यह जंग तीन से चार सप्ताह के भीतर खत्म हो जाएगी, लेकिन अब युद्ध न केवल खिंचता दिख रहा है बल्कि विनाशकारी होता जा रहा है. खाड़ी देश भी युद्ध की आग में झुलस रहे हैं. मिडिल ईस्ट में सबसे ज्यादा तबाही ईरान के शाहेद ड्रोन ने मचाई है. इनसे बचाने के लिए यूक्रेन आगे आया है. जो बीते चार साल से रूस के साथ युद्ध के दौरान इन ड्रोन का सामना कर रहा है.

जेलेंस्की का खाड़ी देशों के साथ समझौता

बता दें कि बीते सप्ताह ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने मिडिल ईस्ट का दौरा किया था. इस दौरान यूक्रेन ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के साथ ऐतिहासिक समझौते किए हैं. यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यूक्रेन रूस के साथ युद्ध में प्राप्त अनुभव, खासतौर से ईरानी ड्रोन से निपटने की विशेषज्ञता इन देशों के साथ साझा करने की पेशकश की है. इन खाड़ी देशों के साथ हुए समझौते के तहत यूक्रेन इनको ‘स्टिंग’ इंटरसेप्टर और युद्ध के दौरान सीखे गए सबक साझा करेगा.

यूक्रेन ने जॉर्डन और कुवैत को ईरान के शाहेद ड्रोन से निपटने में मदद करने के लिए मिडिल ईस्ट में 200 से ज्यादा एंटी ड्रोन विशेषज्ञों को मोर्चा संभालने के लिए भेजा है.  जिससे इन देशों को तेहरान के ड्रोन अटैक से निपटने में मदद मिल सके. सवाल उठता है कि यूक्रेन अचानक खाड़ी देशों के लिए इतना खास क्यों बन गया है. दरअसल यह सीधे तौर अर्थव्यवस्था और युद्ध के दौरान आने वाली वित्तीय लागत है. मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग से एक और बात साफ हुई है कि हमला करना तो सस्ता हो गया है लेकिन इससे बचाव के लिए खर्च को बोझ बढ़ चुका है.

ईरान के शाहेद ड्रोन क्यों खास

ईरान ने अपने सबसे महत्वपूर्ण हथियार शाहेद का इस्तेमाल अमेरिकी ठिकानों पर बड़ी संख्या में किया है. इसकी यूनिट की कीमत भी 18 से 28 लाख रुपये के आसपास है. एक महीने में इसकी हजारों यूनिट्स का प्रोडक्शन किया जा सकता है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक इन ड्रोन्स ने अमेरिका को सैन्य और आर्थिक दोनों तौर पर नुकसान पहुंचाया. यूएस को अनुमानित नुकसान 2.9 बिलियन डॉलर (2.41 लाख करोड़ रुपये) तक हुआ. जबकि इनका मुकाबला करने के लिए भी उसे महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों की मदद लेनी पड़ी. यानी इन ड्रोन्स को महंगे एयर डिफेंस सिस्टम से गिराना आर्थिक रूप से बहुत घाटे का सौदा होता है.

यूक्रेन ने ढूंढी काट

रूस के साथ जंग लड़ रहे यूक्रेन को भी कुछ ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था. ईरान ने रूस को यूक्रेन के खिलाफ इस्तेमाल के लिए ये शाहेद ड्रोन उपलब्ध कराए थे. इनकी मदद से यूक्रेन में कई बड़े ठिकानों पर बमबारी की गई थी. पश्चिमी देशों से यूक्रेन ने मदद मांगी थी लेकिन जब मुकाबला करने के लिए पर्याप्त मात्रा में हथियार नहीं मिल पाए तो उसने खुद ही मोर्चा संभाला. दो साल की मेहनत के बाद यूक्रेन ने शाहेद किलर ड्रोन बनाए. यूक्रेन की रणनीति साफ है, सस्ते ड्रोन का मुकाबला उससे भी सस्ते और ज्यादा स्मार्ट ड्रोन से किया जाए.

क्यों खास हैं यूक्रेन के ड्रोन?

– स्टिंग और बुलेट इंटरसेप्टर, से 2025 के मध्य से अब तक हज़ारों रूसी शाहेद ड्रोन को मार गिराया है. इनकी सफलता दर 70-90 प्रतिशथ है.
–  स्टिंग इन इंटरसेप्टर की रफ्तार 315 से 340 किमी की रफ्तार तक है, यह 10000 फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता है. टारगेट का पता नहीं लगने पर यह अपने बेस पर वापस लौट सकता है.
–  इन इंटरसेप्टर को ऑपरेटर कंट्रोल करते हैं, जो FPV (फर्स्ट-पर्सन व्यू) गॉगल्स के जरिए मॉनिटर पर उन्हें ट्रैक करते हैं. 
–  वहीं, बुलेट जेट इंजन और चार रोटर से चलता है. यह टारगेट का पता लगाने के लिए AI का इस्तेमाल करता है. यह 130-309 किमी की गति से उड़ता है.

 

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