रात के दो बजे हैं। क्रिकेट के मैदान पर चौकों-छक्कों की बरसात हो रही है। करीब 40 हजार युवा दर्शकों का जोश तालियों के साथ नजर आ रहा है। तस्वीर कश्मीर के पुलवामा की है। कभी आतंक, पथराव और बंद के लिए सुर्खियों में रहने वाले पुलवामा में तालियों की यह गूंज घाटी के बदलते माहौल और युवाओं की बदलती पसंद की कहानी कह रही है। रॉयल प्रीमियर लीग में बुधवार की रात कश्मीर ने उस पीढ़ी की तस्वीर पेश की, जो भविष्य को बंदूक से नहीं, बल्ले, किताब, हुनर और रोजगार से जोड़ना चाहती है। मैदान में खूब नारे लगे, पर विरोध के नहीं, अपनी पसंदीदा टीम के समर्थन के।

पुलवामा स्पोर्ट्स स्टेडियम में बुधवार देर शाम रॉयल प्रीमियर लीग सीजन-2 का शानदार आगाज हुआ। उद्घाटन मुकाबला सुल्तान वॉरियर्स बारामुला और रॉयल गुडविल के बीच खेला गया। रात आठ बजे फ्लड लाइट्स जलते ही स्टेडियम करीब 50 हजार से अधिक दर्शकों के जोश और नारों से गूंज उठा। मैच को लेकर युवाओं में इतना उत्साह था कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 400 से अधिक पुलिस और सीआरपीएफ जवानों को तैनात करना पड़ा। इस टूर्नामेंट में घाटी की शीर्ष 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं।
स्थानीय क्रिकेट प्रेमी मुसर्रत अहमद ने कहा कि रात के समय फ्लड लाइट्स में मैच देखना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। स्थानीय बुजुर्ग बशीर अहमद ने कहा कि स्टेडियम में युवाओं और परिवारों का इस तरह उमड़ना साबित करता है कि घाटी अब शांति, खेल और प्रगति की राह चुन चुकी है। अब हमारे युवा किसी के बहकावे में नहीं आने वाले। हमें तालीम के साथ तरक्की भी चाहिए।
चिंताओं और खौफ को भुलाकर नई उम्मीद जगाने का मंच
ट्रॉफी का अनावरण करने पहुंचे स्थानीय विधायक वहीद-उर-रहमान पर्रा ने कहा कि यह बस खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि उन युवाओं के जीवन में खुशी और उम्मीद लाने का प्रयास है जिन्होंने लंबे समय तक दर्द और तनाव देखा है। यह लीग युवाओं को एक साथ आने, चिंताओं को भुलाने और खेल भावना का आनंद लेने का खुला मंच देती है। खचाखच भरे स्टेडियम और मैदान पर पसीना बहाते युवा साफ संदेश दे रहे हैं कि कश्मीर अब डर पर उम्मीद और अंधेरे पर रोशनी को तरजीह दे रहा है।
खामोशी की जगह तालियों ने ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मन की बात कार्यक्रम में टूर्नामेंट की नींव रखने वाले युवा उद्यमी व खेल आयोजक इरफान के प्रयासों की सराहना कर चुके हैं। स्थानीय युवाओं को खेल से जोड़ने की उनकी इस पहल ने पुलवामा का माहौल बदल दिया है। आयोजकों और कोर ग्रुप के संस्थापक सदस्य सलीम मलिक ने कहा कि कश्मीर अब खेल भी रहा है और जश्न भी मना रहा है। यह लीग युवाओं के सपनों को उड़ान देने, अलगाव को अपनेपन में बदलने और खामोशी को तालियों की गूंज में तब्दील करने का जरिया बन चुकी है।
सुरक्षा सुधरी तो बढ़ी गतिविधियां
घाटी में सुरक्षा स्थिति में सुधार के साथ सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आई है। पर्यटन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग और श्रीनगर में बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक पहुंच रहे हैं। इसके साथ होटल, परिवहन, रेस्तरां और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी अवसर बढ़े हैं।
दुनिया की नजर भी बदली
कश्मीर में सुधरती सुरक्षा और पर्यटन की संभावनाओं पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा बढ़ी है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की दो दिवसीय जम्मू-कश्मीर यात्रा के दौरान उन्होंने क्षेत्र की खूबसूरती और सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख किया है। कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय धारणा में बदलाव पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बदलाव की असल तस्वीर किसी बयान से ज्यादा उन लोगों के जीवन में दिखाई देती है, जो बुधवार देर रात तक क्रिकेट देखने के लिए मैदान में जुट रहे।

