
ऑफिस लौटने का नाम सुनकर क्यों होने लगती है बेचैनी?
मैटरनिटी लीव के बाद काम पर लौटना सिर्फ रोज ऑफिस जाने की शुरुआत नहीं होती. एक महिला को एक साथ मां और प्रोफेशनल, दोनों जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती हैं. इसी वजह से मन में कई तरह के सवाल चलने लगते हैं. बच्चे को कौन संभालेगा? ऑफिस में काम कैसे मैनेज होगा? अगर बच्चे को मेरी जरूरत हुई तो क्या होगा? ऐसी चिंताएं एंग्जायटी बढ़ा सकती हैं.
नींद की कमी भी बन सकती है वजह
छोटे बच्चे के साथ नई मां की नींद अक्सर पूरी नहीं हो पाती. रात में बार-बार बच्चे के उठने से थकान बनी रहती है. जब इसी हालत में सुबह जल्दी उठकर ऑफिस जाना और काम पर ध्यान देना पड़े, तो मानसिक दबाव और बढ़ सकता है. लगातार थकान से चिड़चिड़ापन और बेचैनी भी महसूस हो सकती है.
बच्चे को लेकर रहता है गिल्ट
कई महिलाओं के मन में यह डर भी रहता है कि ऑफिस जाने की वजह से वे बच्चे को पर्याप्त समय नहीं दे पा रही हैं. दूसरी ओर, ऑफिस का काम अधूरा रहने या उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने का दबाव भी रहता है. घर और काम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में यह गिल्ट और तनाव बढ़ सकता है.
सपोर्ट की कमी से बढ़ सकती है परेशानी
अगर परिवार, पार्टनर या ऑफिस की तरफ से पर्याप्त सहयोग न मिले तो स्थिति और मुश्किल हो सकती है. काम के घंटों में थोड़ी फ्लेक्सिबिलिटी, बच्चे को फीड कराने की सुविधा और जरूरत पड़ने पर छुट्टी जैसी व्यवस्थाएं नई मां के लिए काफी मददगार हो सकती हैं.
खुद पर ज्यादा दबाव न डालें
इस दौरान हर चीज को अकेले संभालने की कोशिश न करें. पार्टनर और परिवार से मदद मांगें और अपनी परेशानी खुलकर बताएं. अगर बेचैनी लगातार बनी रहती है, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं या तनाव संभालना मुश्किल लग रहा है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
नई मां के लिए ऑफिस लौटना एक बड़ा बदलाव है. इसलिए इस दौरान खुद को समय देना और परिवार व कार्यस्थल से जरूरी सहयोग लेना बेहद अहम है.
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