Cash Deposite Income Tax: दिल्ली के रहने वाले एक एक प्रॉपर्टी डीलर ने अपने बैंक खाते में 54 लाख रुपये नकद जमा किए, जिसके बाद तो बवाल ही मच गया. इन रुपयों को इनकम टैक्स विभाग ने उसकी अघोषित आय मान लिया. लेकिन प्रॉपर्टी डीलर भी इस पर चुप नहीं रहा बल्कि इसका विरोध किया और मामला इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT), दिल्ली पहुंचा दिया, जहां से डीलर को राहत मिल गई.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल ये मामला वित्त वर्ष 2011-12 का है. टैक्स विभाग को डीलर के बैंक खाते में बड़ी मात्रा में कैश जमा होने की जानकारी मिली. जिसके बाद विभाग ने उसे कई नोटिस भेजे, लेकिन बिल्डर की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला. जिसके बाद असेसिंग ऑफिसर ने 54 लाख रुपये को उसकी आय मानकर टैक्स के दायरे में जोड़ दिया.
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डीलर ने बताई इतने कैश की वजह
बाद में डीलर ने बताया कि वो प्रॉपर्टी सौदों में सिर्फ ब्रोकर का काम करता था. खरीदारों से मिली रकम वो अपने बैंक खाते में जमा करता था और फिर प्रॉपर्टी के मालिकों यानी बेचने वालों को दे देता था. डीलर ने अपने दावे के समर्थन में बैंक स्टेटमेंट, खरीदारों और विक्रेताओं के हलफनामे और प्रॉपर्टी की सेल डीड जैसे दस्तावेज पेश किए. ITAT ने इन सबूतों को स्वीकार करते हुए 54 लाख रुपये की टैक्स जोड़ को हटा दिया.
अन्य डीलरों के लिए बड़ा सबक
इस एक केस से अन्य डीलर्स को भी एक बड़ा सबक मिला है. किसी व्यक्ति के बैंक खाते में पैसा आ जाने का मतलब ये जरूरी नहीं है कि वो पैसा उसी व्यक्ति की आय है. असली सवाल ये है कि पैसा किसका था और इसे क्यों लिया गया था. अगर कोई प्रॉपर्टी डीलर किसी खरीदार से 50 लाख रुपये लेता है और बाद में ये साबित कर देता है कि रकम विक्रेता को देने के लिए मिली थी, तो इसे उसकी आय नहीं माना जा सकता. लेकिन इसके लिए उसके पास सबूत के रूप में कुछ दस्तावेज भी होना चाहिए, जैसे:
- खरीदार या विक्रेता के साथ लिखित एग्रीमेंट या अथॉरिटी लेटर
- खरीदार/विक्रेता का नाम और पेन नंबर
- प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी
- कैश रिसीविंग रसीद
- कैश बुक या लेजर में एंट्री
- रकम आगे किसे दी गई, इसका रिकॉर्ड
- बैंक स्टेटमेंट में पैसे के आने-जाने का साफ रिकॉर्ड
- रकम पाने वाले व्यक्ति की रसीद
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ऐसे मामले में सबसे बड़ी सीख ये है कि बैंक खाते में बड़ी रकम जमा होने पर सिर्फ ये कहना काफी नहीं है कि पैसा किसी और का था. डीलर को ये साबित करना होगा कि पैसा किसका था, क्यों मिला और आखिर में कहां गया. मजबूत दस्तावेज और साफ बैंक ट्रेल होने पर टैक्स विवाद से बचने में मदद मिल सकती है.

