बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद शुरुआती सियासी झटकों के बाद अब परिपक्व नजर आने लगे हैं। हालांकि, उनके तेवर अभी भी बरकरार हैं। सोमवार को हाथरस के सादाबाद में जनसभा के जरिये उत्तर प्रदेश में उनकी करीब दो साल बाद दोबारा लॉन्चिंग हुई। भाषण में पार्टी सुप्रीमो मायावती की नसीहतों का असर साफ दिखाई दिया, वहीं युवाओं के बीच उनका आकर्षण भी बरकरार नजर आया। इस तरह आकाश ने अपनी दोबारा लॉन्चिंग के जरिये लंबी सियासी पारी खेलने के संकेत दिए।
दरअसल, पिछले दिनों बसपा में मची उठापटक का सबसे अधिक असर आकाश पर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। मायावती ने उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को दूसरी बार पार्टी से बाहर कर दिया था। इस फैसले के बाद पारिवारिक कलह एक बार फिर सतह पर आ गई थी। इसके बावजूद आकाश ने इसका असर खुद पर नहीं आने दिया और पुराने तेवर में जनसभा को संबोधित किया।
उनके निशाने पर भाजपा और सपा के साथ कांग्रेस भी रही। युवाओं के प्रदर्शन का मुद्दा उठाकर उन्होंने विपक्षी दलों को आईना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि, उन्होंने ऐसा कोई विवादास्पद बयान नहीं दिया, जिससे उनके सियासी रूप से परिपक्व होने का संकेत मिला।