झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन भी जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा सदन के अंदर और बाहर छाया रहा। विपक्षी दल भाजपा और आजसू ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई। भाजपा विधायकों ने छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच आवश्यक है।

सरकार छात्रों की मांगों के प्रति संवेदनशील नहीं है- नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी
प्रदर्शन के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार छात्रों की मांगों के प्रति संवेदनशील नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र पिछले 13 दिनों से सत्याग्रह पर बैठे हैं और कई छात्र भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार उनकी चिंता नहीं कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो वह सीबीआई जांच से क्यों बच रही है। भाजपा के अन्य विधायकों ने भी सरकार पर छात्रों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
झारखंड में जंतर-मंतर जैसा माहौल नहीं बनने देंगे- मंत्री सुदिव्य कुमार
वहीं, सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार की वार्ता में वास्तविक आंदोलनकारी छात्र नहीं, बल्कि कोचिंग संचालक और बाबूलाल मरांडी के करीबी लोग शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा रांची में भी दिल्ली के जंतर-मंतर जैसा माहौल बनाना चाहती है, लेकिन राज्य सरकार ऐसा नहीं होने देगी।
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मंत्री चमरा लिंडा, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप समेत सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने भी भाजपा पर इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया। जेपीएससी मुद्दे पर सदन के भीतर भी विपक्ष के हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही दोपहर 12:30 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

