दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के अवैध गर्भपात और अधिकारियों को मामले की जानकारी न देने की आरोपी एक डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने या उसमें हस्तक्षेप करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है।
हाईकोर्ट ने यह साफ किया है कि डॉक्टरों को केवल मरीज के साथ आए किसी व्यक्ति के मौखिक दावे के आधार पर उम्र नहीं मान लेनी चाहिए, बल्कि इसके लिए उचित दस्तावेजों से उम्र की पुष्टि करना अनिवार्य है।


