बड़े कॉलेज में पढ़ाई कर बेहतर कॅरिअर का सपना लेकर बंगलूरू पहुंचे घुमारवीं के युवक की एक भूल ने उसकी जिंदगी बदल दी। नया शहर, कॉलेज के नए दोस्त और घर से दूर आजादी। इन सबके बीच दोस्तों के कहने पर उसने नशा कर लिया। उस समय यह महज एक अनुभव लगा, लेकिन यही एक कदम धीरे-धीरे उसे ऐसी अंधेरी दुनिया में ले गया, जहां पढ़ाई, सपने और रिश्ते सब पीछे छूटने लगे। समय रहते परिवार ने उसके व्यवहार में आए बदलाव को पहचान लिया, इलाज और काउंसलिंग कराई जिससे उसकी जिंदगी बच गई। हालांकि, नशे की गर्त में फंसे अन्य चार युवक इलाज न मिलने के कारण हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गए। यह कहानी सिर्फ नशे की नहीं, बल्कि उस मानसिक और सामाजिक दबाव की है, जो कई युवाओं को अनजाने में विनाश की राह पर धकेल देता है।

