राजस्थान पुलिस के लिए बुधवार का दिन बेहद दुखद साबित हुआ। भीलवाड़ा के सदर थाना प्रभारी (सीआई) लोकपाल सिंह राठौड़ (38) का उदयपुर के अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। मंगलवार शाम अपने सरकारी आवास पर नाकाबंदी ड्यूटी के लिए तैयार होते समय उनकी सर्विस रिवॉल्वर से संदिग्ध परिस्थितियों में गोली चल गई, जो उनके सिर में जा लगी। गंभीर रूप से घायल होने पर उन्हें पहले भीलवाड़ा और बाद में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर उदयपुर के गीतांजलि अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। इस घटना ने न केवल भीलवाड़ा पुलिस महकमे, बल्कि पूरे राजस्थान पुलिस परिवार को स्तब्ध कर दिया। एक कर्मठ, अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के असामयिक निधन से पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई।
नाकाबंदी पर जाने की तैयारी, तभी हुआ हादसा
मंगलवार शाम थाना क्षेत्र में विशेष नाकाबंदी अभियान प्रस्तावित था। सीआई लोकपाल सिंह अपने सरकारी आवास पर वर्दी पहनकर ड्यूटी के लिए तैयार हो रहे थे। उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारी को फोन कर कहा था, “गाड़ी तैयार रखना, मैं आ रहा हूं। बताया जा रहा है कि इसी दौरान सर्विस रिवॉल्वर संभालते समय अचानक गोली चल गई। गोली उनकी कनपटी के पास लगी और सिर के आर-पार निकल गई। गोली की आवाज सुनकर घर में मौजूद उनकी पत्नी मौके पर पहुंचीं और तुरंत पुलिस को सूचना दी। कुछ ही मिनटों में पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे और उन्हें खून से लथपथ हालत में अस्पताल पहुंचाया गया।
पहले भीलवाड़ा, फिर उदयपुर किया गया रेफर
घायल लोकपाल सिंह को सबसे पहले महात्मा गांधी जिला अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ के अनुसार, उनके सिर में गंभीर चोट थी और न्यूरोसर्जरी की तत्काल आवश्यकता थी। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रामस्नेही अस्पताल ले जाया गया। बाद में परिजनों की सहमति से बेहतर इलाज के लिए उदयपुर रेफर कर दिया गया।
भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक सागर राणा के निर्देश पर देर रात भीलवाड़ा से उदयपुर तक लगभग 157 किलोमीटर लंबे मार्ग पर ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। रास्ते में पड़ने वाले सभी थाना क्षेत्रों की पुलिस ने यातायात नियंत्रित कर एंबुलेंस को तेजी से आगे बढ़ाया। आईसीयू एंबुलेंस करीब 95 मिनट में उदयपुर के गीतांजलि अस्पताल पहुंची, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा। करीब आठ घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद बुधवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
पुलिस महकमे में शोक की लहर
लोकपाल सिंह राठौड़ वर्ष 2014 बैच के पुलिस अधिकारी थे। वे पिछले करीब दो वर्षों से भीलवाड़ा जिले में सेवाएं दे रहे थे। इससे पहले उन्होंने बिजौलिया और जहाजपुर थानों में थाना प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी निभाई थी। हाल ही में उन्हें सदर थाने की कमान सौंपी गई थी। सहकर्मियों के अनुसार, वे शांत स्वभाव, अनुशासित और बेहद कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनकी कार्यशैली की सराहना की जाती थी। उनके निधन की खबर मिलते ही पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों में शोक की लहर दौड़ गई। अस्पताल और पुलिस लाइन में बड़ी संख्या में अधिकारी व जवान एकत्रित हुए।
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दो महीने पहले ही हुई थी दूसरी शादी
लोकपाल सिंह मूल रूप से अजमेर जिले के बिजयनगर क्षेत्र के नादसी गांव के निवासी थे। परिवार में माता-पिता और तीन भाई हैं। जानकारी के अनुसार, उनकी पहली पत्नी से तलाक हो चुका था। करीब दो महीने पहले ही उन्होंने दूसरा विवाह किया था। इस हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
व्हाट्सएप स्टेटस बना चर्चा का विषय
घटना के बाद उनका व्हाट्सएप स्टेटस भी चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने लिखा था, “होइहि सोइ जो राम रचि राखा, को करि तर्क बढ़ावै साखा।” इसके साथ उन्होंने एक और पंक्ति लिखी थी, “स्वाभिमान से समझौता नहीं, चाहे कुछ भी करना पड़े।” उनके निधन के बाद यह स्टेटस सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है और उनके परिचित व साथी अधिकारी उन्हें भावुक होकर याद कर रहे हैं।
हर पहलू से जांच में जुटी पुलिस
भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला आवास पर सर्विस रिवॉल्वर से गोली लगने का है। हालांकि, गोली किन परिस्थितियों में चली, यह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस घटना के हर पहलू की गहन जांच कर रही है। तकनीकी साक्ष्य, फॉरेंसिक जांच और अन्य तथ्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम का परीक्षण किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों को लेकर कोई निष्कर्ष निकाला जाएगा।

