शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) पर छात्रवृत्ति के नियमों में बदलाव किया गया है। अब अगर कोई छात्र कल्याण-आधारित छात्रवृत्ति प्राप्त कर रहा है और बाद में योग्यता-आधारित छात्रवृत्ति के लिए पात्र हो जाता है, तो उसे योग्यता-आधारित छात्रवृत्ति से सिर्फ इस वजह से वंचित नहीं किया जाएगा। इसी तरह, योग्यता-आधारित छात्रवृत्ति पाने वाले छात्र के लिए भी यह नियम लागू होगा।
सरकार ने यह बदलाव छात्रवृत्ति योजनाओं को लेकर अलग-अलग विभागों के बीच बनी असमंजस की स्थिति को दूर करने के लिए किया है। वर्ष 2024-25 में NSP पर डुप्लिकेशन हटाने की प्रक्रिया के दौरान कई छात्रों को गलती से डुप्लिकेट लाभार्थी के रूप में चिह्नित किया गया था। CBSE ने सभी संबद्ध स्कूलों से इन नए नियमों की जानकारी पात्र छात्रों, अभिभावकों और अन्य संबंधित लोगों तक पहुंचाने को कहा है।
छात्रवृत्ति योजनाओं को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जाएगा
सरकार ने छात्रवृत्ति योजनाओं के बीच दोहराव और भ्रम को दूर करने के लिए इनके नियमों में एकरूपता लाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि कौन-सी योजना किस तरह के छात्रों के लिए है और उसका मकसद क्या है। इसके तहत छात्रवृत्ति को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है:
- मेरिट-आधारित स्कॉलरशिप: ये स्कॉलरशिप छात्रों के अच्छे शैक्षणिक प्रदर्शन, रैंक या प्रतियोगी/क्वालीफाइंग परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर दी जाती हैं। इनका उद्देश्य छात्रों की योग्यता और बेहतर प्रदर्शन को बढ़ावा देना है। इसमें नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम (NMMSS), सेंट्रल सेक्टर स्कॉलरशिप स्कीम और INSPIRE जैसी योजनाएं शामिल हैं।
- कल्याण-आधारित स्कॉलरशिप: इनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर या खास सामाजिक वर्गों के छात्रों को आर्थिक मदद देना है, ताकि उन्हें पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिल सके। SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए चलने वाली प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप इसके उदाहरण हैं।