गुजरात की सीमा पर स्थित राजस्थान का मानगढ़ धाम, जिसे राजस्थान का जलियांवाला बाग भी कहा जाता है, राष्ट्रीय स्मारक नहीं बनेगा। इसका प्रमुख कारण यह है कि धाम पर हुए आधुनिक निर्माण कार्य राष्ट्रीय स्मारक बनने की राह में बाधा बन गए हैं। नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल की ओर से लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सदन में बताया कि केंद्र सरकार का मानना है कि मानगढ़ धाम राष्ट्रीय स्मारक घोषित किए जाने योग्य नहीं है। इसलिए इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है।


यह बताया कारण
केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में बताया कि मानगढ़ धाम स्थल का सर्वे किया गया था। सर्वे में पाया गया कि यहां बड़े पैमाने पर आधुनिक निर्माण कार्य हुए हैं। आधुनिक बदलाव के कारण मानगढ़ धाम अपनी पुरातात्विक विशेषताओं, अखंडता और प्रमाणिकता को बनाए नहीं रखता है। प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के प्रावधानों को मानगढ़ धाम पूरा नहीं करता है।

बड़े पैमाने पर हुए हैं निर्माण
उल्लेखनीय है कि मानगढ़ धाम पर पैनोरमा बनाने के साथ ही वृहद स्तर पर निर्माण कार्य हुए हैं। यहां विशाल शहीद स्तंभ बनाया गया है। इसके अलावा मानगढ़ धाम की धूनी को भी विकसित किया गया है। यही निर्माण कार्य धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलने की राह में बाधा बन गए हैं।
मोदी की यात्रा से जगी थी उम्मीद
गत लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानगढ़ धाम का दौरा किया था। इस दौरान गुजरात और राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मौजूद थे। उस समय मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किए जाने की उम्मीद जगी थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने राज्यों की एक समिति बनाने की बात कही थी। इसके बाद वर्ष 2022 में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष तरुण विजय ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की सिफारिश भी की थी।

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अंग्रेजों ने किया था नरसंहार
मानगढ़ धाम पर 13 नवंबर 1913 को गोविंद गुरु के नेतृत्व में उनके अनुयायियों की सभा आयोजित की गई थी। तत्कालीन अंग्रेज सरकार ने इसे विद्रोह मानते हुए पहाड़ी पर एकत्र अनुयायियों पर गोलियां चलवा दी थीं, जिसमें 1,500 से अधिक आदिवासी शहीद हो गए थे। इसी कारण मानगढ़ धाम को राजस्थान का जलियांवाला बाग भी कहा जाता है।

राजनीति भी गरमाई
संसद में केंद्रीय मंत्री के जवाब के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीति भी गरमा गई है। भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने कहा है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के लाखों आदिवासियों की आस्था के केंद्र मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिलाने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने कोई प्रभावी पैरवी नहीं की। उनके अनुसार, दोनों दलों ने मानगढ़ धाम के नाम पर आदिवासियों का केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है। संसद में दिए गए इस जवाब का असर आगामी पंचायतीराज चुनावों पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है।