
- भारत ने चीन का एक, हांगकांग के तेरह FDI प्रस्तावों को मंजूरी दी.
- गलवान विवाद बाद चीन से FDI पर सरकार की सख्त निगरानी है.
- मेक इन इंडिया हेतु चुनिंदा हांगकांग प्रस्तावों को मंजूरी मिली है.
- कुल 63 FDI प्रस्तावों में सिंगापुर सबसे बड़ा निवेशक रहा.
Chinese FDI proposal: कारोबारी साल 2026 में चीनी निवेश पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत ने चीन के सिर्फ एक FDI प्रस्ताव (1 करोड़ रुपये का) को मंजूरी दी, जबकि हांगकांग के 13 आवेदनों (610.42 करोड़ रुपये के) को हरी झंडी दिखाई है. संसद में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा साझा की गई इस जानकारी के मुताबिक, भारत ने पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश को लेकर अपनी सख्त राष्ट्रीय नीति (National Security Screening) को बरकरार रखा है.
चीन के निवेश प्रस्तावों पर इतनी सख्ती क्यों?
FDI के लिए दी जाने वाली ये मंजूरियां इसलिए भी अहम है क्योंकि साल 2020 में गलवान घाटी विवाद के बाद भारत सरकार ने DPIIT (डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ़ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड) के ‘प्रेस नोट 3’ के तहत भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले किसी भी देश जैसे कि चीन या पाकिस्तान से आने वाले हर छोटे-बड़े निवेश के लिए सरकार की अग्रिम मंजूरी अनिवार्य कर दी.
इसके चलते चीन से आने वाले हर प्रस्ताव की पहले गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय की एक संयुक्त स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा जांच की जाती है. यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि भारतीय कंपनियों को चीनी के किसी भी तरह के परोक्ष नियंत्रण से बचाया जा सके.
हांगकांग के 13 प्रस्तावों को क्यों दी गई मंजूरी?
भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पार्ट्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे कई सेक्टर्स में अपने ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देने के लिए उन चुनिंदा हांगकांग बेस्ड कंपनियों को मंजूरी दे रही है, जिनके बिना भारतीय उद्योगों की इनपुट सप्लाई प्रभावित हो सकती है. हालांकि, जांच इनकी भी कड़ाई से की जाती है.
DPIIT के डेटा के अनुसार, सरकार ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान कुल मिलाकर 10,292.67 करोड़ रुपये (यानी 1.18 अरब डॉलर) के 63 FDI (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) प्रस्तावों को मंजूरी दी है. मंजूरी मिले FDI प्रस्तावों की वैल्यू के हिसाब से सिंगापुर सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है. वहां से आए पांच प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जिनकी कुल वैल्यू 3,259.88 करोड़ रुपये (382.52 मिलियन डॉलर) थी.
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