नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और परीक्षाओं में धांधली के आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। देश भर की राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए सरकार ने छह विशेषज्ञों की एक हाई-पावर टास्क फोर्स का गठन किया है।
इस उच्चस्तरीय समिति का नेतृत्व आईटी कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक और देश के जाने-माने तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि को सौंपा गया है। इस पूरी टीम में शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा और प्रशासन से जुड़ी शीर्ष हस्तियों को शामिल किया गया है, ताकि एक बेहद मजबूत परीक्षा ढांचा तैयार किया जा सके।
क्या करेगी यह टास्क फोर्स?
केंद्र सरकार ने इस समिति को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की पूरी परीक्षा प्रणाली की नए सिरे से समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी है। यह टास्क फोर्स परीक्षा की हर प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए अपने सुझाव सौंपेगी।
इसके अलावा, यह समिति साइबर सुरक्षा को अभेद्य बनाने, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था में बड़े सुधार करने और परीक्षा संचालन में समय के अनुसार जरूरी बदलाव करने की सिफारिशें भी तैयार करेगी।
कौन हैं नंदन नीलेकणि और उनके पांच दिग्गज सहयोगी?
नंदन नीलेकणि: आईटी कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं और भारत की आधार परियोजना को लागू करने वाली संस्था UIDAI के पहले अध्यक्ष रह चुके हैं। डिजिटल तकनीक, बड़े डाटा सिस्टम और सरकारी डिजिटल सेवाओं को मजबूत बनाने का उनका अनुभव एनटीए के लिए तकनीकी रोडमैप तैयार करने में सबसे अहम साबित होगा।
एस. सोमनाथ: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व चेयरमैन हैं। चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता के दौरान उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी। जटिल वैज्ञानिक परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने का उनका अनुभव परीक्षा प्रणाली के मजबूत क्रियान्वयन में काम आएगा।
तपन डेका: देश के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों में गिने जाते हैं। वे इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के पूर्व निदेशक रहे हैं और लंबे समय तक आंतरिक सुरक्षा तथा आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़े रहे। परीक्षा प्रणाली में गोपनीयता बनाए रखने और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में उनकी भूमिका बेहद खास होगी।
वी. कामकोटि: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के निदेशक हैं। वे कंप्यूटर साइंस और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ हैं। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे आधुनिक तकनीक का उपयोग कर ऑनलाइन और ऑफलाइन परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के सुझाव देंगे।
अनीता करवाल: भारत सरकार में पूर्व शिक्षा सचिव रह चुकी हैं। उन्होंने स्कूल शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और विभिन्न सरकारी योजनाओं को लागू करने में अहम भूमिका निभाई है। शिक्षा प्रशासन का उनका लंबा अनुभव नीतिगत सुधारों और बेहतर संस्थागत प्रबंधन में मदद करेगा।
अमृत लाल मीणा: वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, जिनके पास प्रशासन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में लंबा अनुभव है। केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके मीणा का अनुभव परीक्षा केंद्रों के चुनाव, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित आवाजाही और परीक्षा संचालन को व्यवस्थित करने में उपयोगी रहेगा।
क्यों बनाई गई यह समिति?
बीते कुछ समय में नीट-यूजी समेत कई राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और तरह-तरह की अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे। इन घटनाओं ने लाखों छात्रों और अभिभावकों के भरोसे को तगड़ा झटका दिया था।
छात्रों की इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है। सरकार की कोशिश है कि भविष्य में आयोजित होने वाली सभी राष्ट्रीय परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी हों, जिससे छात्रों का सिस्टम पर भरोसा फिर से कायम हो सके।


