बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की जाएगी। देश के कानून मंत्री मोहम्मद असदुज्जमान ने रविवार को यह जानकारी दी। 76 वर्षीय मोहम्मद शहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए शुक्रवार को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल समाप्त होने में अभी दो वर्ष बाकी थे। वह अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के करीबी सहयोगी माने जाते हैं।

उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब अटकलें लगाई जा रही थीं कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार औपचारिक भूमिका वाले राष्ट्रपति के पद पर उनकी मौजूदगी से असहज थी। चटगांव में पत्रकारों से बातचीत में कानून मंत्री असदुज्जमान ने कहा, “सरकार किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं करना चाहती, लेकिन राष्ट्रपति बनने से पहले उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है।”
संसद अध्यक्ष बने कार्यवाहक राष्ट्रपति
उन्होंने कहा कि जनभावनाओं को देखते हुए जांच पूरी होने के बाद पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संविधान के अनुसार संसद अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद अगले 90 दिनों तक कार्यवाहक राष्ट्रपति का दायित्व संभालेंगे। इस अवधि के भीतर नए राष्ट्रपति का चुनाव कराया जाएगा।
चिकित्सा उपचार के लिए विदेश गए संसद अध्यक्ष अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति का कार्यभार संभालने के लिए अपना दौरा बीच में छोड़कर स्वदेश लौट आए। शहाबुद्दीन का चुनाव 13 फरवरी 2023 को तत्कालीन संसद ने राष्ट्रपति के रूप में किया था। जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन में शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने के बाद भी वह अपने संवैधानिक पद पर बने रहने वाले एकमात्र शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारी थे।
शेख हसीना से फोन पर बातचीत करने का लगा आरोप
शेख हसीना 5 अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं। शहाबुद्दीन का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही शेख हसीना ने मौत की सजा लंबित होने के बावजूद दिसंबर तक बांग्लादेश लौटने की तैयारी की घोषणा की थी। इससे देश की राजनीति में हलचल मच गई थी।
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि शहाबुद्दीन ने हाल ही में फोन पर शेख हसीना से बातचीत की थी, जिससे सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) का शीर्ष नेतृत्व नाराज हो गया था। हालांकि, शहाबुद्दीन ने गुरुवार को द डेली स्टार को दिए एक साक्षात्कार में इन खबरों को “निराधार” बताया था।
राष्ट्रपति बनने से पहले किन पदों पर रह चुके थे शहाबुद्दीन?
1971 के मुक्ति संग्राम के योद्धा और निचली अदालत के पूर्व न्यायाधीश रहे शहाबुद्दीन राष्ट्रपति बनने से पहले वैधानिक भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (एसीसी) में आयुक्त और बाद में निजी इस्लामी बैंक बांग्लादेश के निदेशक भी रह चुके हैं। कानून मंत्री ने संकेत दिया कि एसीसी और इस्लामी बैंक में निदेशक के रूप में उनके कार्यकाल की भी सरकारी जांच के दायरे में समीक्षा की जा रही है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या पूर्व राष्ट्रपति की विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया है, तो असदुज्जमान ने कहा कि यह मामला गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। शहाबुद्दीन की गिरफ्तारी की संभावना के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल ऐसी मांग कर सकते हैं और उसकी कानूनी वैधता की जांच की जाएगी।
मोहम्मद शहाबुद्दीन ने क्यों दिया इस्तीफा?
अधिकारियों के अनुसार, शहाबुद्दीन रविवार को राष्ट्रपति भवन बंगाभवन छोड़कर राजधानी ढाका के गुलशन स्थित अपने निजी आवास में चले गए। नियमों के अनुसार, इस्तीफे के बाद उन्हें 30 दिन तक राष्ट्रपति भवन में रहने की अनुमति थी। संसद अध्यक्ष को भेजे अपने इस्तीफे में शहाबुद्दीन ने लिखा कि वह हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और किडनी संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं। हाल ही में उनमें ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी बीमारी का भी पता चला है।
उन्होंने लिखा, “इन बीमारियों के कारण मैं राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारियों का शारीरिक और मानसिक रूप से निर्वहन करने में सक्षम नहीं हूं।” राष्ट्रपति के रूप में वह सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर थे। हालांकि कार्यपालिका की वास्तविक शक्तियां प्रधानमंत्री के पास होती हैं और यह पद मुख्य रूप से औपचारिक माना जाता है।
मोहम्मद यूनुस की सरकार पर लगाया था अपमान का आरोप
2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद उनका पद चर्चा में आ गया था, जब मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने उन पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया था। 12 फरवरी को हुए चुनाव से दो महीने पहले, जिसने यूनुस के 18 महीने के शासन का अंत किया, शहाबुद्दीन ने मीडिया से कहा था कि अंतरिम सरकार ने उनका “अपमान” किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि विदेशों में स्थित बांग्लादेशी दूतावासों से उनके चित्र भी हटा दिए गए।
उस समय उन्होंने दावा किया था कि उन्हें बीएनपी का “100 प्रतिशत समर्थन” मिला था और सेना, नौसेना के साथ वायुसेना प्रमुख भी उनके साथ मजबूती से खड़े थे। दिसंबर 2025 में दिए एक साक्षात्कार में शहाबुद्दीन ने कहा था कि फरवरी में चुनाव कराने की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी करने के बाद वह इस्तीफा देना चाहते हैं।
