अनंतनाग हमले की अब तक की जांच और विशेषज्ञों से मिले इनपुट के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों को इसमें विदेशी आतंकियों के शामिल होने के संकेत मिले हैं। यह भी पता चला है कि आतंकी सुनियोजित साजिश के तहत स्थानीय पुलिस को अन्य जगहों पर भी निशाना बना सकते हैं। इसके पीछे मंशा स्थानीय भूगोल और आतंकियों के नेटवर्क को करीब से जानने वाली कड़ी को तोड़ना और भय का माहौल बनाना है।

जांच एजेंसियों के शुरुआती इनपुट और पिछले मामलों को देखें तो कई बड़े हमलों में विदेशी, विशेषकर पाकिस्तान से प्रशिक्षित आतंकियों की भूमिका सामने आती रही है। अनंतनाग मामले में भी जांच एजेंसियों को कुछ ऐसे ही संकेत मिले हैं। हमले को जिस तरह से पेशेवर अंदाज में अंजाम दिया गया है, उससे यही लगता है कि संबंधित आतंकी को इसके लिए लंबा प्रशिक्षण दिया गया है। वह काफी समय से स्थानीय क्षेत्र में सक्रिय भी रहा है। यह सब बिना स्थानीय मददगार के संभव नहीं हो सकता। यही कारण है कि बुधवार दोपहर बाद से बृहस्पतिवार देर रात तक जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की है। पूरे इलाके को सील कर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
लश्कर के दो आतंकियों के घर ध्वस्त
अनंतनाग में पुलिस हेड कांस्टेबल की टारगेट किलिंग के महज 24 घंटे के भीतर प्रशासन व सुरक्षाबलों ने बृहस्पतिवार को लश्कर-ए-ताइबा के दो खूंखार आतंकियों के घरों को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया। कार्रवाई के तहत पहला निशाना बिजबिहाड़ा के गुरी गांव निवासी लश्कर-ए-ताइबा के आतंकी आदिल अहमद ठोकर का नवनिर्मित मकान बना। सुरक्षाबल अप्रैल 2025 में ही आदिल का पुश्तैनी घर ध्वस्त कर चुके हैं। इससे पहले हसनपोरा तवेला के रहने वाले लश्कर का सक्रिय आतंकी हारून रशीद गनई का एक मंजिला मकान बुधवार रात गिरा दिया गया।
संगठित नेटवर्क कर रहा काम ः विशेषज्ञ
यह बड़े और संगठित तरीके से चलाया जा रहा नेटवर्क है। देश के कई हिस्सों में इस तरह की कोशिशें सामने आ रही हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर, विशेषकर जम्मू संभाग पर जोर दिया गया है। यहां जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) बदलाव लाने की मंशा से लंबे समय से प्रयास किए जाने की आशंका रही है। अब जांच एजेंसियां इन गतिविधियों और उनसे जुड़े नेटवर्क की गहन जांच कर रही हैं। गृह मंत्रालय ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 के तहत धार्मिक गतिविधियों के लिए विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को और सख्त किया है। इससे ऐसे मामलों पर काफी हद तक अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। पहचान और दस्तावेज के सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत करना होगा, ताकि घुसपैठ और फर्जी पहचान के नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
-एसपी वैद्य, पूर्व डीजीपी, जम्मू-कश्मीर

