GST on Mango Drinks: अगर आप गर्मियों में आम का जूस या मैंगो ड्रिंक खरीदना पसंद करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. अब आने वाले समय में आम के जूस की कीमत और उस पर लगने वाला GST इस बात पर निर्भर कर सकता है कि उसमें असली आम का गूदा यानी पल्प कितना इस्तेमाल किया गया है. सरकार एक नए नियम पर विचार कर रही हैं, जिसके तहत उन मैंगो ड्रिंक्स को टैक्स में राहत दी जा सकती है जिनमें असली आम का पल्प ज्यादा इस्तेमाल किया गया हो. इस प्रस्ताव का खास मकसद कंपनियों को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने के लिए प्रोत्साहित करना और आम ग्राहकों को फायदा पहुंचना है.
किसे मिलेगा 5% GST का फायदा?
सरकारी समिति ने बताया है कि जिन मैंगो ड्रिंक्स में 22% से 25% या उससे ज्यादा नेचुरल आम का पल्प होगा, उन्हें 5% GST की मौजूदा रियायती दर का फायदा मिलता रहेगा. वहीं, जिन उत्पादों में पल्प की मात्रा तय सीमा से कम होगी, उन पर अधिक GST लगाया जा सकता है. हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने का अंतिम फैसला सरकार और GST परिषद की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा.
क्यों आया यह प्रस्ताव?
टोटापुरी आम मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में उगया जाता है. लेकिन इस सीजन में टोटापुरी आम की कीमतों में गिरावट से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. एक्सपर्टों के मुताबिक, प्रोसेसिंग कंपनियों की धीमी खरीद और कम पल्प वाले ड्रिंक्स की बढ़ती बिक्री इसकी एक सबसे बड़ी वजह रही.
किसानों और ग्राहकों कैसे होगा फायदा?
- कंपनियां अपने उत्पादों में ज्यादा प्राकृतिक आम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित होंगी.
- इससे टोटापुरी आम की मांग बढ़ने की उम्मीद है.
- इससे किसानों को अपनी फसल का पहले के मुकाबले बेहतर और अच्छी कीमत में मिल सकती है.
- ग्राहकों को ऐसे मैंगो ड्रिंक मिलेंगे जिनमें असली फल की मात्रा पहले से ज्यादा होगी.
- साथ ही इससे प्रोसेस्ड मैंगो इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
क्या होगा अगला कदम?
- सरकार इस प्रस्ताव पर GST परिषद, FSSAI और वित्त, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण व स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ चर्चा करेगी.
- इसके बाद मैंगो ड्रिंक के लिए टैक्स (GST) ढांचा तैयार किया जा सकता है.
- समिति ने टोटापुरी आम के बागों को बेहतर बनाने के लिए और किसानों को वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करने की भी सिफारिश की है.
