महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को जंतर- मंतर पर सोमवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव की। उन्होंने कहा कि हालांकि सभी को शांतिपूर्ण विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना, बिना अनुमति के प्रदर्शन करना और हिंसा का सहारा लेना स्वीकार्य नहीं है।
फडणवीस ने जोर देकर कहा कि बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन करना या हिंसा का सहारा लेना किसी भी परिस्थिति में अस्वीकार्य है। इसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने क्या कहा?
पत्रकारों से बात करते हुए फड़नवीस ने कहा, ‘लोकतंत्र में हर किसी को विरोध करने का अधिकार है। हालांकि, विरोध करते समय संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों और इसके द्वारा निर्धारित जिम्मेदारियों दोनों को ध्यान में रखना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति उचित अनुमति के साथ शांतिपूर्ण विरोध करता है, तो ऐसी अनुमति दी जाएगी,। हर किसी को ऐसे विरोध करने का अधिकार है।
मंच का दुरुपयोग करते हैं
दूसरी ओर, जानबूझकर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना, बिना अनुमति के विरोध करना या हिंसा का सहारा लेना किसी भी परिस्थिति में अस्वीकार्य है। इसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि जब कोई आंदोलन चेहराविहीन या नेतृत्वविहीन हो जाता है, तो कुछ तत्व उसमें घुसपैठ करने लगते हैं और अपने स्वार्थों को पूरा करने के लिए उस मंच का दुरुपयोग करते हैं।
पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी सरकार अपने नागरिकों के खिलाफ बल का प्रयोग नहीं करना चाहती, लेकिन सोमवार की स्थिति में पुलिस को हस्तक्षेप करना आवश्यक हो गया था।
महाराष्ट्र के मंत्री बावनकुले ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को नीट परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध-प्रदर्शन को सरकार को बदनाम करने के लिए किया गया। उन्होंने इसे नाटक बताया। इसके साथ ही दावा किया कि युवाओं में जो गुस्सा दिख रहा है, वह ‘बनाया-बनाया’ (मनगढ़ंत) है।
बीजेपी के इस वरिष्ठ नेता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बचाव किया और संसद तक सीजेपी के मार्च के दौरान कथित तौर पर हुई पत्थरबाजी की घटनाओं की गहन जांच की मांग की।
सांसद संजय राउत ने क्या मांग की?
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने सोमवार को दिल्ली में मुख्य न्यायाधीश के संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई की केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया। इसके साथ ही मांग की कि 20 जुलाई को हर साल कायरों का दिन के रूप में मनाया जाए।
राउत ने क्या आरोप लगाया
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राउत ने कहा कि देश के युवाओं ने अपने गुस्से को जिस तरह से प्रदर्शित किया है, उसे वे स्वयं लोकतंत्र की अभिव्यक्ति मानते हैं। इसके साथ ही आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अमानवीय कृत्यों का सहारा लिया।
राउत ने कहा, ‘कल देश की युवा शक्ति ने अपने गुस्से और आक्रोश को उस तरह से व्यक्त किया जिसे हम लोकतंत्र मानते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की सरकार और उनकी पुलिस ने उन युवा लड़कों और लड़कियों पर जिस तरह के अमानवीय लाठीचार्ज, आंसू गैस, घसीटना, टांगें तोड़ना और सिर फोड़ना जैसे कृत्य किए।’

