इससे पहले 2004-05 में समाजवादी पार्टी का संसद मार्च पटेल चौक तक पहुंचा था, तब पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए संसद के सामने रेल भवन और कृषि भवन के गोल चक्कर के पास लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले चलाए।
मार्च के नजदीक आने की जानकारी मिलते ही सुरक्षा कर्मियों को दौड़ लगानी पड़ी। इसके बाद संसद का गेट बंद कर दिया। संसद के अंदर सुरक्षा काफी कड़ी की गई है। जवानों ने कई स्तर का सुरक्षा घेरा बना रखा है। संसद भवन के सामने की सड़क पर आंसू गैस के गोले दागे जाने के बाद अफरातफरी के बीच भाग रहे लोगों का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चल रहा है।
इस दौरान पुलिस की पूरी कोशिश प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने की है। संसद भवन का इलाका दोपहर बाद खाली करवा लिया गया। इसके बाद वहां के हालात सामान्य हुए। लेकिन वहां से हटने के बाद प्रदर्शनकारी इससे लगी दूसरी सड़कों पर फैल गए थे। देर शाम तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच रस्साकशी चलती रही।
दोपहर 2 बजे हालात और बिगड़े
पुलिस बैरिकेडिंग, नारेबाजी, धक्का-मुक्की और कार्रवाई के बीच जंतर-मंतर से लेकर संसद मार्ग, अशोक रोड, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में घंटों हंगामा चलता रहा। कई जगह हालात संभालने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा।





