भारत सरकार द्वारा पैसेंजर वाहनों के लिए प्रस्तावित नए ईंधन दक्षता मानकों (CAFE-III) को लेकर रेटिंग एजेंसी इक्रा (Icra) ने एक अहम रिपोर्ट जारी की है। इक्रा के अनुसार, ये नए कड़े नियम भारत को कम कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा-कुशल वाहन पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) की तरफ तेजी से ले जाएंगे। इसके अलावा, ये नियम देश के वाहन चालकों के लिए भी बड़ी आर्थिक बचत का जरिया बनने वाले हैं।
ईंधन खर्च में ₹38,000 करोड़ की बचत कैसे होगी?
इक्रा की रिपोर्ट में इन नियमों से देश को होने वाले बड़े आर्थिक और पर्यावरणीय फायदों का गणित समझाया गया है:
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बड़ी संचयी बचत:
वित्त वर्ष 2028 से 2032 (FY28-32) की अवधि के दौरान, इन नियमों के कारण देश में ईंधन की खपत में भारी कमी आएगी, जिससे कुल मिलाकर लगभग ₹38,000 करोड़ की संचयी ईंधन लागत बचत होने का अनुमान है।
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वाहनों की बढ़ती संख्या के बावजूद बचत:
जैसे-जैसे सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे बेहतर ईंधन मानकों के कारण सालाना होने वाली बचत के आंकड़े भी लगातार बड़े और मजबूत होते जाएंगे।
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कम कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य:
समय के साथ ईंधन की खपत घटने से पैसेंजर गाड़ियों से निकलने वाली हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस के उत्सर्जन में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी।