टीनएजर्स जब स्कूल जाने की तैयारी कर रहे होते हैं तो उस समय 17 साल की रिद्धि चौहान ड्रिल फील्ड पर होती हैं, जहां वो लगभग 300 कैडेट्स की प्रैक्टिस को लीड कर रही होती हैं. क्वींस के बेंजामिन एन कार्डोजो स्कूल की ये भारतीय-अमेरिकी छात्रा स्कूल की नेवी जूनियर रिजर्व ऑफिसर्स ट्रेनिंग कॉर्प्स (NJROTC) की बटालियन कमांडिंग ऑफिसर हैं, जो इस प्रोग्राम में स्टूडेंट लीडरशिप का सबसे बड़ा पद है.
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक रिद्धि चौहान का नेवल एकेडमी प्रिपरेटरी स्कूल में एडमिशन हो गया है. इस तरह यूनाइटेड स्टेट्स नेवी में उनका कमीशंड ऑफिसर बनने का सपना अब कुछ ही दूर है. रिद्धि ने लीडरशिप स्किल्स बेहतर करने के लिए फ्रेशमैन के तौर पर NJROTC प्रोग्राम जॉइन किया था. वहां उन्होंने कई लीडरशिप रोल निभाए- जैसे एकेडमिक कमांडर, STEM कमांडर, प्लाटून लीडर और इंस्पेक्शन कमांडर और आखिर में वो बटालियन कमांडिंग ऑफिसर बनीं.
रिद्धि बटालियन की रोजमर्रा की गतिविधियों को संभालती हैं और ट्रेनिंग सेशन की देखरेख करती हैं. वो जूनियर कैडेट्स को गाइड करती हैं. हफ़्ते में चार दिन वह क्लास शुरू होने से पहले ड्रिल की प्रैक्टिस करवाने के लिए सुबह 7 बजे से पहले ही स्कूल पहुंच जाती हैं. उनकी उपलब्धियां सिर्फ लीडरशिप तक ही सीमित नहीं हैं. एकेडमिक कमांडर के तौर पर उन्होंने लगातार 2 साल तक अपने स्कूल की टीम को ‘लीडरशिप एंड एकेडमिक बाउल’ के दूसरे राउंड के लिए क्वालिफ़ाई करने में मदद की. साथ ही नेशनल एकेडमिक परीक्षा में यूनिट को पहला स्थान दिलाने में योगदान दिया.
अंडरवॉटर रोबोट कार्यक्रम को किया लीड
रिद्धि चौहान ने बटालियन के पहले ‘सी-पर्च’ (SeaPerch) अंडरवॉटर रोबोट कार्यक्रम को भी लीड किया है, जिससे कैडेट्स को रोबोटिक्स और इंजीनियरिंग का प्रैक्टिकल अनुभव मिला. रिद्धि का मानना है कि लीडरशिप का मतलब है दूसरों की सेवा करना और मिसाल कायम करना. उनका कहना है कि महंत स्वामी महाराज से मिली विनम्रता, दया और निस्वार्थ सेवा की सीख और BAPS स्वामीनारायण संस्था के साथ उनके जुड़ाव ने उनकी लीडरशिप शैली को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है.
राजस्थान से है परिवार
रुचिका और दिलीप चौहान की बेटी रिद्धि का परिवार मूल रूप से राजस्थान के जयपुर से है. सिर्फ 17 साल की उम्र में ही उन्होंने सैंकड़ों कैडेट्स की अगुवाई की है और कई छात्रों को प्रेरित किया है.
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