लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

Rajasthan:सिस्टम की लापरवाही ले रही प्रसूताओं की जान? जानें 8 इंस्ट्रूमेंट सेट पर रोजाना 40 सिजेरियन का सच? – Rajasthan News: System Failure Behind Maternal Deaths? Only 8 Instrument Sets Used For 40 Daily C-sections

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में पिछले कुछ महीनों के दौरान प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार हो रही मौतों ने राज्य की मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व में प्रसूताओं की मौतों को लेकर अमानक दवाओं के मामले सामने आ चुके हैं। इसी बीच भीलवाड़ा में प्रसूताओं की मौत के बीच एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में हर रोज औसतन 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन किए जाते हैं, जबकि ऑपरेशन के लिए केवल आठ इंस्ट्रूमेंट सेट उपलब्ध हैं। इनमें पांच नियमित सर्जरी और तीन आपातकालीन मामलों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट सेट को दोबारा उपयोग में लेने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत कम से कम तीन घंटे तक स्टरलाइज करना आवश्यक होता है, ताकि संक्रमण का खतरा पूरी तरह समाप्त हो सके। ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या भीलवाड़ा में प्रसूताएं सरकारी सिस्टम की लापरवाही की बलि चढ़ गईं? 

कोटा: सबसे बड़ा मामला, संक्रमण के बाद पांच महिलाओं की मौत

सबसे गंभीर मामला मई में कोटा के जेके लोन अस्पताल और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सामने आया। सिजेरियन प्रसव के बाद 12 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, जिनमें संक्रमण और अन्य जटिलताओं के चलते चार प्रसूताओं और एक गर्भवती महिला सहित पांच महिलाओं की मौत हो गई।

मामले के बाद सरकार ने व्यापक प्रशासनिक कार्रवाई की। कई डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया, एक चिकित्सक को बर्खास्त किया गया तथा अस्पताल अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। प्रमुख शासन सचिव (स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ और चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने स्वयं कोटा पहुंचकर हालात की समीक्षा की।

यह भी पढें– अब AI चलाएगा जयपुर का ट्रैफिक: जाम देखकर खुद बदलेंगे सिग्नल, 253 चौराहों पर लागू होगी नई तकनीक

बीकानेर: सिजेरियन के बाद किडनी फेलियर, तीन महिलाओं की मौत

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई महिलाओं की किडनी प्रभावित होने का मामला सामने आया। सभी को आईसीयू में भर्ती कर डायलिसिस सहित उपचार दिया गया लेकिन इलाज के दौरान तीन महिलाओं की मौत हो गई। विभाग अब यह जांच कर रहा है कि एक साथ कई मरीजों में किडनी फेलियर जैसी स्थिति क्यों बनी।

जोधपुर: प्रसव संबंधी जटिलताओं से दो मौतें

जोधपुर जिले के भोपालगढ़ उपजिला अस्पताल में पांच दिनों के भीतर दो प्रसूताओं की मौत हो गई। दोनों को हालत बिगड़ने पर उम्मेद अस्पताल रैफर किया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मामले के बाद एक महिला चिकित्सक और एक नर्सिंग अधिकारी को एपीओ किया गया तथा विशेषज्ञ जांच समिति गठित की गई।

भीलवाड़ा: छह दिन में पांच मौतें, ओटी प्रोटोकॉल जांच के घेरे में

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 5 से 10 जुलाई के बीच छह दिनों में पांच प्रसूताओं की मौत ने पूरे प्रदेश का ध्यान खींचा। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि ऑपरेशन थिएटर से लिए गए नमूनों, उपकरणों, स्टेरलाइजेशन व्यवस्था, दवाओं और संपूर्ण ओटी प्रोटोकॉल की जांच की जा रही है। 

उन्होंने कहा कि हाई-रिस्क मरीजों में अत्यधिक रक्तस्राव, गंभीर एनीमिया और उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताओं की भी विस्तृत समीक्षा की जा रही है।

बांसवाड़ा: चार दिन में चार मौतें

बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में चार दिनों के भीतर चार प्रसूताओं की मौत के बाद जिला प्रशासन ने पांच वरिष्ठ चिकित्सकों की जांच समिति गठित की है। जयपुर से भी विशेषज्ञ टीम भेजी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दो महिलाएं पहले से गंभीर थीं, जबकि दो की ऑपरेशन के बाद अचानक तबीयत बिगड़ी।

हर जिले में लगभग एक जैसी तस्वीर

इन मामलों में कुछ समान तथ्य सामने आए हैं-


  • अधिकांश मौतें प्रसव या सिजेरियन के बाद हुईं।

  • कई मरीजों में संक्रमण, किडनी फेलियर, अत्यधिक रक्तस्राव या अन्य गंभीर जटिलताएं सामने आईं।

  • सभी प्रमुख मामलों में जांच समितियां गठित की गईं।

  • कई डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई हुई।

  • बावजूद इसके अधिकांश मामलों की अंतिम जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है।

कोटा की रिपोर्ट अब भी सार्वजनिक नहीं

कोटा मामले की जांच के लिए गठित हाईलेवल कमेटी अपनी रिपोर्ट चिकित्सा मंत्री को सौंप चुकी है। यह रिपोर्ट एसएमएस मेडिकल कॉलेज, कोटा मेडिकल कॉलेज और एम्स की विशेषज्ञ समितियों के निष्कर्षों के आधार पर तैयार की गई थी। हालांकि विभाग ने अब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। मंत्री पहले भी कह चुके हैं कि कोटा और बीकानेर की घटनाओं का कारण समान नहीं था और प्रत्येक मामले में अलग-अलग चिकित्सकीय परिस्थितियां सामने आई थीं।

ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन भी जांच के दायरे में

कोटा मामले की जांच के दौरान इस्तेमाल किए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के नमूने जांच में अमानक पाए गए थे। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण विभाग ने संबंधित बैच को तत्काल बाजार से हटाने के निर्देश दिए। लैब जांच में पाया गया कि इंजेक्शन में आवश्यक ऑक्सीटोसिन तत्व ही मौजूद नहीं था। इसके बाद निर्माता कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।

मंत्री बोले- लोग सरकारी अस्पताल इसलिए आते हैं क्योंकि यहां उम्मीद होती है

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में अधिकांश मरीज तब पहुंचते हैं, जब निजी अस्पताल गंभीर मामलों में हाथ खड़े कर देते हैं। उन्होंने कहा- “आखिर लोग हमारे पास इलाज के लिए क्यों आते हैं? क्योंकि जब निजी अस्पताल मरीजों का इलाज करने से मना कर देते हैं, तब वही मरीज सरकारी अस्पतालों में आते हैं। अधिकांश मामले पहले से ही अत्यंत गंभीर होते हैं।”

खींवसर ने कहा कि राज्य सरकार मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उनके अनुसार प्रदेश में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़कर 94.1 प्रतिशत हो गया है, जो राष्ट्रीय औसत से लगभग चार प्रतिशत अधिक है।

उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा और बांसवाड़ा सहित सभी मामलों की निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार जांच कराई जा रही है। अब तक उपलब्ध तथ्यों में किसी चिकित्सकीय लापरवाही की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या प्रोटोकॉल के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

Isp:भारत का पहला आईएसपी जारी, अप्रैल में 14 प्रमुख क्षेत्रों में दिखी डबल-डिजिट ग्रोथ, जानें आंकड़ों में क्या – India Launches Debut Services Production Index: 14 Out Of 19 Sub-sectors Record Shows Growth In April

जहर खाकर स्कूल वैन से भिड़ा दी कार!:बुलंदशहर में दंपती का खौफनाक फैसला, पति-पत्नी ने क्यों उठाया ये कदम? – Couple Consumes Poison Amidst Domestic Dispute Out Of Control Car Collides With School Van

Bengal:19 साल बाद कोलकाता लौटेंगी लेखिका तस्लीमा नसरीन, भाजपा सरकार आयोजित कराएगी ‘कट्टरता विरोधी’ कार्यक्रम – Taslima Nasrin To Return To Kolkata After 19 Years For Anti-fundamentalism Event

Team India:सूर्यकुमार यादव के लिए पूरी तरह बंद नहीं हुए दरवाजे! पूर्व कप्तान की किस तरह हो सकती है वापसी? – Doors For Suryakumar Yadav Still Open In Indian Team? How Can The Former Captain Make A Comeback Know Details

क्या अख्तर-आसिफ भारत में ड्रग्स लाते थे?:mha के पूर्व अधिकारी का दावा- वूल्मर की मौत भी शायद इसी वजह से हुई – Former Mha Official Rvs Mani Alleges Pakistani Cricketers Akhtar-asif Brought Drugs Into India

Explainer:राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में क्यों कहां-कहां हुई प्रसूताओं की मौत, क्या कर रही है सरकार? – Why Have Maternal Deaths Been Reported Across Rajasthan’s Government Hospitals? What Is The Govt Doing?

Leave a Comment