लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

कौन हैं डी-वोटर, कैसे तय होती है नागरिकता?:असम Cm ने बताई पूरी प्रक्रिया, दो साल में कितने लोग किए गए डिपोर्ट – Assam D Voters Citizenship Status Foreigners Tribunal Himanta Biswa Sarma Explains

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

असम की मतदाता सूची में इस समय 91 हजार से ज्यादा ‘संदिग्ध मतदाता’ यानी ‘डी-वोटर’ मौजूद हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में क्या बताया?


  • कांग्रेस विधायक नुरुल इस्लाम के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मतदाता सूची में कुल 91,385 डी-वोटर हैं।

  • उन्होंने बताया कि इनमें सबसे ज्यादा 13,719 संदिग्ध मतदाता सोनितपुर जिले में हैं। बारपेटा में 8,081 डी-वोटर हैं, जबकि उदलगुड़ी और नगांव जिलों में भी ऐसे संदिग्ध मतदाताओं की संख्या 7,800 से ज्यादा है।

  • मुख्यमंत्री ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देश पर राज्य में 1997 से उन मतदाताओं के नाम के आगे ‘डी’ लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिनकी नागरिकता को लेकर संदेह या विवाद था। 

  • राज्य के गृह मंत्री के तौर पर जवाब देते हुए सरमा ने बताया कि 56,728 डी-वोटर को विदेशी न्यायाधिकरणों ने विदेशी घोषित किया है। इनमें से 831 लोगों ने हाईकोर्ट में अपील की थी और अदालत ने उन्हें भी विदेशी माना।

  • उन्होंने बताया कि 65,171 डी-वोटर को विदेशी न्यायाधिकरणों ने भारतीय नागरिक घोषित किया है।

  • सरमा ने बताया कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 42 और सुप्रीम कोर्ट ने तीन डी-वोटर को देश का वैध नागरिक माना है।

  • कांग्रेस विधायक वाजेद अली चौधरी के एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि 1997 में जब डी-वोटर की पहचान की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब राज्य में ऐसे मतदाताओं की संख्या 1,99,596 थी। 

  • उन्होंने कहा कि अब तक डी-वोटर से जुड़े 2,44,144 मामले विदेशी न्यायाधिकरणों को भेजे गए हैं। इनमें से 2,05,659 मामलों का निपटारा हो चुका है और 56,728 लोगों को विदेशी घोषित किया गया है।

  • मुख्यमंत्री ने बताया कि सीमा पुलिस ने डी-वोटर के अलावा 1,90,657 अन्य मामलों को भी विदेशी न्यायाधिकरणों के पास भेजा है। इनमें से 1,55,490 मामलों का निपटारा किया जा चुका है और 1,15,945 लोगों को विदेशी घोषित किया गया है।

  • मुख्यमंत्री ने बताया कि विदेशी घोषित किए गए लोगों में से 31,789 लोगों को देश से बाहर भेजा जा चुका है।

क्या होते हैं डी-वोटर?

चुनाव आयोग ने असम में 1997 में ‘डी’ वोटर की व्यवस्था शुरू की थी। इसके तहत उन लोगों की सूची बनाई गई थी, जो अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज नहीं दे पाए थे। देश के किसी अन्य हिस्से में डी-वोटर की व्यवस्था नहीं है।

असम में डी-वोटर का मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक रूप से सबसे ज्यादा विवादित विषयों में से एक है। अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के मुद्दे पर कई चुनाव लड़े गए हैं। जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में पाए जाते हैं और जिनकी नागरिकता पर संदेह होता है, उन्हें शुरुआत में डी-वोटर के रूप में चिह्नित किया जाता है। 

किसी डी-वोटर का नाम हटाना या उसकी स्थिति सामान्य करना विदेशी न्यायाधिकरण के आदेश और बाद में ऊपरी अदालतों के फैसलों के आधार पर किया जाता है।

कितने अवैध बांग्लादेशी वापस भेजे गए?

मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि असम से पिछले दो साल में बांग्लादेश के 1,600 से ज्यादा अवैध प्रवासियों को वापस भेजा गया है।  

एआईयूडीएफ विधायक बदरुद्दीन अजमल के सवाल का जवाब देते हुए सरमा ने कहा कि नागरिकता से जुड़े मामलों में राज्य सरकार केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करती है। उन्होंने कहा कि कानून लागू करते समय मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, पिछले दो वर्षों में असम से कुल 1,679 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश वापस भेजा गया है। उन्होंने विधानसभा में जानकारी दी कि इन लोगों की पहचान के बाद एक जुलाई 2024 से 30 जून 2026 के बीच उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई की गई।

ये भी पढ़ें: नाबालिग से छेड़छाड़ का मामला: सहायक पुलिस आयुक्त की जमानत याचिका खारिज, मुंबई की कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?

मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ अवैध प्रवासियों को वापस भेजा गया, कुछ को निष्कासित किया गया, जबकि कुछ लोगों को निर्वासन प्रक्रिया के जरिये उनके देश लौटाया गया। सरमा ने कहा कि अगर किसी पहचान किए गए अवैध प्रवासी की हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित है, तो उसे वापस नहीं भेजा जाता। 

अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की प्रक्रिया क्या है?

जब मुख्यमंत्री से घुसपैठियों को वापस भेजने की प्रक्रिया के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि नागरिकता का विषय केंद्र सरकार के अधीन आता है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय मौजूदा कानूनों और केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि असम सरकार केंद्र को दरकिनार कर किसी अन्य देश के साथ सीधे इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करती।

उन्होंने कहा, राज्य सरकार नागरिकता से जुड़े कानूनों और केंद्र सरकार के निर्देशों को लागू करती है। इन कानूनों और निर्देशों को लागू करते समय पर्याप्त सुरक्षा उपाय रखे जाते हैं, ताकि किसी व्यक्ति के मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो। 

Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

द बोनस मार्केट अपडेट:भारतीय बाजार की मिली-जुली शुरुआत, क्या कच्चे तेल की कीमतें निवेशकों के लिए चिंता का विषय – Sensex Opening Bell Share Market Opening Sensex Nifty Share Market  opening Share Market News And Updates

सुप्रीम कोर्ट:नीट आंदोलनकारियों के खिलाफ एफआईआर रद्द करने के लिए केंद्र की अर्जी, शीर्ष कोर्ट में सुनवाई आज – Jantar Mantar Neet Protest: Supreme Court To Hear Plea On Firs Against Delhi Protesters

इंटरव्यू:’दायरा’ की कहानी सुनकर क्या बोलीं करीना? मेघना गुलजार ने खोले राज; बताया क्या है सबसे बड़ी कमाई – Meghna Gulzar Exclusive Interview Remembered When Kareena Prithviraj Reaction When She Asked Her About Film

महाराष्ट्र:एनसीपी में अनबन की अटकलों के बीच सुनेत्रा के नेतृत्व में बैठक; क्या संदेश देना चाहती है पार्टी? – Ncp Sunetra Pawar Core Committee Meeting Internal Differences Party Leadership Message

अल-नीनो:1901 के बाद भारत में सबसे गर्म रहा अगस्त, टूटा 125 साल का रिकॉर्ड; जानें इस महीने कैसी होगी बारिश – Imd Monthly Rainfall Likely To Be Below Normal In Sep India Witnessed Hottest Aug Since 1901

एपल मैप्स पर दिखेगा ‘लेक अमेरिका’ नाम?:ट्रंप ने कंपनी को दिए निर्देश; कनाडा क्यों कर रहा विरोध – Trump Has Asked Apple To Change Lake Ontario Name To ‘lake America’ On Its Maps, Interior Chief Says

Leave a Comment