पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक नेताओं में से एक मौलाना फजलुर रहमान का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वे देश के सैन्य प्रतिष्ठान पर तीखा हमला करते दिख रहे हैं।
उन्होंने सेना पर संवैधानिक भूमिका का उल्लंघन करने, राजनीति में हस्तक्षेप करने और हिंसाग्रस्त बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में राज्य का शासन बहाल करने में विफल होने का आरोप लगाया।

मौलाना फजलुर रहमान ने क्या कहा?
पंजाब के कसूर में एक रैली को संबोधित करते हुए जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि सेना को अपनी संवैधानिक सीमाओं के भीतर रहना चाहिए। अगर वह राजनीतिक भूमिका निभाना चाहती है तो उसे चुनाव लड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘अगर आप राजनीति करना चाहते हैं, तो वर्दी उतारकर आएं। चुनावों में भाग लें। इससें यह साफ हो जाएगा कि लोग वर्दीधारी लोगों को कितने वोट देते हैं।’
मौलाना फजलुर रहमान ने क्या दावा किया?
फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति को लेकर दावा किया कि हिंसा के पश्तून-बहुसंख्यक क्षेत्रों में भी फैलने से पहले राज्य ने बलूचिस्तान के बड़े हिस्सों पर अपना नियंत्रण लगातार खो दिया था। उन्होंने पूछा ‘ देश बिखर रहा है। शासक कहां हैं?’ ‘बलूच क्षेत्रों में विद्रोह हुए थे। पूरा बलूच क्षेत्र पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर हो गया था। आज भी वहां पाकिस्तानी सरकार का कोई शासन नहीं है।’ उन्होंने दावा किया कि बिगड़ती सुरक्षा स्थिति अब खैबर पख्तूनख्वा तक फैल गई है।
फजलुर रहमान की टिप्पणियों का कारण क्या था?
यह तीखी आलोचना पाकिस्तान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की ओर से नागरिकों से आतंकवादी समूहों के खिलाफ लड़ाई में सेना के साथ खड़े होने का आग्रह करने के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि व्यापक जन समर्थन के बिना सशस्त्र बल अकेले आतंकवाद को खत्म नहीं कर सकते। फजलुर रहमान ने अपील को सिरे से खारिज कर दिया और तर्क दिया कि देश की रक्षा करना सेना का संवैधानिक दायित्व है। नागरिकों से राज्य की लड़ाई लड़ने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए।
रक्षा के लिए वेतन दिया जाता है
उन्होंने कहा, ‘लोग कहते हैं कि हमारे युवा शहीद बन रहे हैं। आपके युवा इसी उद्देश्य से वर्दी पहनते हैं। उन्हें देश की सुरक्षा की रक्षा के लिए वेतन दिया जाता है।’ उन्होंने आगे कहा कि तुम अपने खून का एहसान मुझ पर क्यों थोप रहे हो? तुम हमारी मेहनत और पसीने से कमाए गए करों से अपना वेतन ले रहे हो।
