कार्यस्थलों पर बढ़ती उम्र के चलते होने वाले भेदभाव की वजह से दुनिया के विकसित और अमीर देशों (ओईसीडी देशों) को वर्ष 2040 तक करीब 47 लाख करोड़ रुपये (500 बिलियन डॉलर) का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यह दावा वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) और मार्श की एक रिपोर्ट में किया गया है। इसमें कहा गया है कि बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन काम करने वाले युवाओं की संख्या उस रफ्तार से नहीं बढ़ रही। ओईसीडी दुनिया के उन 38 अमीर और विकसित देशों का समूह है, जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था है और खुले बाजार की नीतियां चलती हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि 55 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को या तो नौकरी नहीं मिल रही है या उन्हें उनकी योग्यता से निम्न काम मिल रहा है। बुजुर्ग लोगों को लंबे समय तक बेरोजगार रहना पड़ता है और कार्यालयों कुछ ऐसे नियम बन चुके हैं जो उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं। इसी वजह से इतना भारी नुकसान हो रहा है।
कई देशों में दिखने लगा असर
2025 और 2040 के बीच 55 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के बेरोजगार रहने के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था (जीडीपी) पर असर दिखाई देने लगा है।
- अमेरिका को 113 अरब डॉलर, ब्राजील को 105.8 अरब डॉलर, फ्रांस को 106 अरब डॉलर, नीदरलैंड को 26.2 अरब डॉलर, ब्रिटेन को 25.5 अरब डॉलर, कनाडा को 7.5 अरब डॉलर और जापान को 5.8 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
- रिपोर्ट में कहा गया कि उम्र के आधार पर होने वाला यह भेदभाव लोगों को बीमार भी बना रहा है। अध्ययन के मुताबिक, अकेले अमेरिका में इस भेदभाव की वजह से 1.7 करोड़ (17 मिलियन) लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।


